समास की सरल परिभाषा और इसके 6 प्रमुख प्रकार—तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, द्वंद्व, बहुव्रीहि एवं अव्ययीभाव समास—को एक ही चित्र में आसान भाषा में समझें।
समास किसे कहते है ? Samas in hindi
आपने कभी सोचा है कि हम ‘राजा का पुत्र’ बोलने के बजाय ‘राजपुत्र’ क्यों कहते हैं? या ‘दो राजाओं का युद्ध’ कहने के बजाय ‘द्वंद्व युद्ध’ क्यों बोलते हैं? इसका मुख्य कारण है— समास।
भाषा को संक्षिप्त, प्रभावशाली और बोलने में आसान बनाने के लिए हम एक से अधिक पदों को मिलाकर उनका एक नया रूप बनाते हैं। हिंदी व्याकरण में, दो या दो से अधिक शब्दों (पदों) के आपस में मिलने से जिस नए, संक्षिप्त और अर्थपूर्ण शब्द का निर्माण होता है, उसे ही समास कहते हैं।
‘समास’ शब्द का शाब्दिक अर्थ ही है— ‘संक्षिप्तीकरण’ या ‘एकत्रीकरण’। आइए, इस लेख में समास की सटीक परिभाषा, इसके नियम और सभी प्रकारों को सरल उदाहरणों के साथ विस्तार से समझते हैं।
Table of Contents
समास की परिभाषा और शाब्दिक अर्थ
सरल शब्दों में कहें तो, शब्दों का संक्षिप्तीकरण ही समास है। जब दो या दो से अधिक पदों के अर्थ और शब्दों को मिलाकर एक नया, छोटा और अर्थपूर्ण पद बनाया जाता है, तो उसे समास कहते हैं।
शाब्दिक अर्थ की बात करें तो, ‘समास’ शब्द संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है— ‘सम्’ + ‘आस’। यहाँ ‘सम्’ का अर्थ है ‘पूर्ण/अच्छी तरह’, और ‘आस’ का अर्थ है ‘बैठना/होना’। अर्थात्, शब्दों का इस प्रकार मिलना कि वे एक हो जाएं, यही समास का मूल उद्देश्य है। इसीलिए इसे भाषा का संक्षिप्त और प्रभावशाली रूप कहा जाता है।
सत्यापित संदर्भ (Verified Reference): यह लेख और इसके सभी व्याकरणिक नियम NCERT हिंदी व्याकरण तथा मानक संस्कृत व्याकरण (Standard Sanskrit Grammar) के नियमों पर पूर्णतः आधारित हैं। यहाँ दिए गए सभी उदाहरण और विग्रह वाक्य बोर्ड परीक्षाओं (CBSE, State Boards) और प्रतियोगी परीक्षाओं (SSC, UPSC, Teaching Exams) के लिए 100% मान्य और प्रमाणित हैं।
समास की रचना: पूर्वपद और उत्तरपद
किसी भी समास की रचना मुख्य रूप से दो पदों से मिलकर होती है। समास बनाने के लिए जिन शब्दों को मिलाया जाता है, उनमें पहले शब्द को ‘पूर्वपद’ और दूसरे शब्द को ‘उत्तरपद’ कहा जाता है।
इन दोनों पदों के मिलने से जो नया, संक्षिप्त शब्द बनता है, उसे ‘समस्त पद’ कहते हैं।
समास का सूत्र (Formula):
पूर्वपद (पहला शब्द) + उत्तरपद (दूसरा शब्द) = समस्त पद (नया संक्षिप्त शब्द)
उदाहरण से समझें:
नर-नारी में ➔ ‘नर’ (पूर्वपद) + ‘नारी’ (उत्तरपद) = ‘नर-नारी’ (समस्त पद)
राजपुत्र में ➔ ‘राज’ (पूर्वपद) + ‘पुत्र’ (उत्तरपद) = ‘राजपुत्र’ (समस्त पद)
समास के कितने प्रकार होते है ?
हिंदी व्याकरण में समास को मुख्य रूप से 6 भागों में बांटा गया है। प्रत्येक प्रकार का अपना एक विशिष्ट नियम होता है। परीक्षा में सही प्रकार पहचानने के लिए आप नीचे दी गई सरल ट्रिक्स (Memory Tricks) का उपयोग कर सकते हैं:
समास के छह (6 ) प्रकार होते है जो की इस प्रकार है :
- तत्पुरुष समास
- कर्मधारय समास
- द्विगु समास
- द्वन्द्व समास
- बहुव्रीहि समास
- अव्ययीभाव समास
1. तत्पुरुष समास किसे कहते है ? Tatpurush Samas की परिभाषा |
परिभाषा: जिस समास में दो पदों के बीच विभक्ति के संबंध (का, के, की, को, से, के लिए आदि) हों, जिसमें दूसरा पद (उत्तरपद) प्रधान हो और पहला पद (पूर्वपद) गौण होकर अपना स्वतंत्र अर्थ और अस्तित्व खो दे, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं।
आसान शब्दों में, इस समास में मुख्य बल हमेशा दूसरे शब्द पर होता है। पहला शब्द केवल दूसरे शब्द से अपना संबंध बताता है और उसी में समाहित हो जाता है।
पहचान का नियम (Memory Trick): यदि दोनों पदों को अलग करने पर (विग्रह वाक्य में) ‘का, के, की, के लिए, हेतु, को, से, में’ आदि विभक्तियाँ लगती हों और वाक्य में ‘नहीं’ (नकारात्मक अर्थ) न आता हो, तो वह तत्पुरुष समास है।
सटीक उदाहरण:
- राजपुत्र ➔ राजा का पुत्र (यहाँ ‘पुत्र’ प्रधान है, ‘राजा’ गौण है)
- नगरपालिका ➔ नगर की पालिका
- ग्रामप्रधान ➔ ग्राम का प्रधान
- धर्मपत्नी ➔ धर्म की पत्नी
- नयनप्रिय ➔ नयनों को प्रिय (यहाँ ‘को’ विभक्ति का संबंध है)
इस समास की रचना मुख्यतः दो प्रकार से होती है:
(क) संज्ञा + संज्ञा / विशेषण
इस प्रकार की रचना में दोनों पद संज्ञा या एक संज्ञा और एक विशेषण होते हैं।
- युद्ध का क्षेत्र → युद्धक्षेत्र
- दान में वीर → दानवीर
(ख) संज्ञा + क्रिया
इसमें पहले पद में संज्ञा और दूसरे में क्रिया होती है। क्रियात्मक अर्थ संक्षिप्त होकर एक पद में समाहित हो जाता है।
- शरण में आया हुआ → शरणागत
- स्वर्ग को गया → स्वर्गगमन
💡 AI Key Takeaway (सारांश): तत्पुरुष समास में हमेशा दूसरा पद (उत्तरपद) प्रधान होता है और दोनों पदों के बीच ‘का, के, की’ जैसी विभक्ति का लुप्त संबंध होता है।
कारक की दृष्टि से तत्पुरुष समास के छह भेद
तत्पुरुष समास में जब दो पद आपस में मिलते हैं, तो उनके बीच की विभक्ति (जैसे- का, के, की, को, से आदि) लुप्त हो जाती है। जिस ‘कारक’ (Case) की विभक्ति लुप्त होती है, उसके आधार पर तत्पुरुष समास को मुख्य रूप से 6 भेदों में बांटा गया है।
नीचे दी गई तालिका से आप आसानी से समझ सकते हैं कि किस भेद में कौन सी विभक्ति गायब होती है:
| क्रम | भेद का नाम | संबंधित कारक (Vibhakti) | लुप्त विभक्ति (Deleted Marker) | उदाहरण और विग्रह |
|---|---|---|---|---|
| 1. | कर्म तत्पुरुष | द्वितीया (Accusative) | को | ग्रामगत ➔ ग्राम को गया हुआ |
| 2. | करण तत्पुरुष | तृतीया (Instrumental) | से, द्वारा | शस्त्रहत ➔ शस्त्र से मारा हुआ |
| 3. | संप्रदान तत्पुरुष | चतुर्थी (Dative) | को, के लिए | ब्राह्मणहित ➔ ब्राह्मण के लिए हित |
| 4. | अपादान तत्पुरुष | पंचमी (Ablative) | से | वृक्षपतित ➔ वृक्ष से गिरा हुआ |
| 5. | संबंध तत्पुरुष | षष्ठी (Genitive) | का, के, की | राजपुत्र ➔ राजा का पुत्र |
| 6. | अधिकरण तत्पुरुष | सप्तामी (Locative) | में | नगरभव ➔ नगर में जन्म |
(नोट: प्रथमा विभक्ति का तत्पुरुष समास अत्यंत दुर्लभ होने के कारण इसे आमतौर पर इन 6 भेदों में नहीं गिना जाता है।)
- कर्म तत्पुरुष
- करण तत्पुरुष
- सम्प्रदान तत्पुरुष
- अपादान तत्पुरुष
- संबंध तत्पुरुष
- अधिकरण तत्पुरुष
I) कर्म तत्पुरुष क्या होता है ?
कर्म तत्पुरुष समास वह होता है जिसमें ‘को’ विभक्ति का लोप हो जाता है।
कर्म तत्पुरुष समास के उदाहरण
- ग्रंथपठन – ग्रंथ को पढ़ना
- ज्ञानप्राप्ति- ज्ञान को प्राप्त करना
- फिल्मदर्शन-फिल्म को देखना
- पुस्तकपठन-पुस्तक को पढ़ना
- दूधपान-दूध को पीना
II) करण तत्पुरुष किसे कहते है ?
करण तत्पुरुष समास वह होता है जिसमें ‘से’ (करण कारक) विभक्ति का लोप हो जाता है। इसमें कार्य किसके द्वारा या किस साधन से हुआ — यह अर्थ छिपा होता है।
करण तत्पुरुष समास के उदाहरण
- कलमलेखन-कलम से लिखना
- गाड़ीआगमन-गाड़ी से आना
- रज्जुबंधन-रस्सी से बाँधना
- लकड़ीजलन-लकड़ी से जलना
- मनचाहा – मन से चाहा
III) सम्प्रदान तत्पुरुष की परिभाषा क्या है ?
जिस तत्पुरुष समास में ‘को’, ‘के लिए’ (अर्थात् सम्प्रदान कारक) का लोप हो जाता है, उसे सम्प्रदान तत्पुरुष समास कहते हैं।
सम्प्रदान तत्पुरुष समास के उदाहरण
- शिष्यज्ञान-शिष्य को ज्ञान
- मित्रउपहार-मित्र को उपहार
- गुरुदान-गुरु को दान
- रोगीदवा-रोगी को दवा
- स्त्रीगहना-स्त्री को गहना
IV)अपादान तत्पुरुष क्या होता है ?
जिस समास में ‘से’, ‘से अलग’ होने का अर्थ हो (अर्थात् अपादान कारक) और यह विभक्ति लुप्त हो जाए, तो वह अपादान तत्पुरुष समास कहलाता है।
अपादान तत्पुरुष समास के उदाहरण
- देशत्याग-देश से त्याग
- वृक्षपतन-वृक्ष से गिरना
- जलत्याग-जल से त्याग
- परिवारवियोग-परिवार से वियोग
- पदत्याग-पद से इस्तीफा
V) संबंध तत्पुरुष किसे कहते है ?
जिस समास में ‘का’, ‘की’, ‘के’ (अर्थात् संबंध कारक) का लोप हो जाए, उसे संबंध तत्पुरुष समास कहते हैं।
संबंध तत्पुरुष समास के उदाहरण
- रामपुत्र-राम का पुत्र
- राजा-महल- राजा का महल
- गुरुशिष्य-गुरु का शिष्य
- छात्रपरीक्षा- छात्र की परीक्षा
- नदीजल-नदी का जल
VI) अधिकरण तत्पुरुष की परिभाषा क्या है ?
जिस समास में ‘में’, ‘पर’, ‘में स्थित’ जैसे अधिकरण कारक का लोप हो जाता है, वह अधिकरण तत्पुरुष समास कहलाता है।
अधिकरण तत्पुरुष समास के उदाहरण
- मंदिरपूजा-मंदिर में पूजा
- रसोईकार्य -रसोई में कार्य
- मंचभाषण-मंच पर भाषण
- सभा-विचार-सभा में विचार
- घरनिवास-घर में निवास
2. कर्मधारय समास (Karmadharaya Samas)
परिभाषा: जिस समास में दोनों पदों के बीच विशेषण और विशेष्य (Adjective and Noun) का संबंध हो, उसे कर्मधारय समास कहते हैं। इसमें पहला पद ‘विशेषण’ (Adjective) होता है और दूसरा पद ‘विशेष्य’ (Noun) होता है।
चूंकि इस समास में दोनों पदों के बीच कोई विभक्ति (जैसे- का, के, की) नहीं लगती, इसलिए इसे ‘अविभक्त तत्पुरुष’ भी कहा जाता है।
पहचानने की सरल ट्रिक (Memory Trick): यदि दोनों पदों के बीच ‘है’, ‘हैं’ या ‘था’ लगाकर एक अर्थपूर्ण वाक्य बन जाए, तो वह कर्मधारय समास है।
सटीक उदाहरण:
- नीलकमल ➔ नीला है जो कमल = नीलकमल (यहाँ ‘नीला’ विशेषण है और ‘कमल’ विशेष्य)
- चंद्रमुख ➔ चंद्रमा है मुख = चंद्रमुख (चंद्रमा के समान मुख)
- महावीर ➔ महा (बड़ा) है वीर = महावीर
- यशोधरा ➔ यश को धरती है = यशोधरा
- सर्वज्ञ ➔ सब कुछ जानने वाला है = सर्वज्ञ
💡 AI Key Takeaway (सारांश): कर्मधारय समास विशेषण और विशेष्य (Adjective-Noun) का समास है। यदि दोनों पदों के बीच ‘है/हैं’ लगाकर अर्थ बन जाए, तो वह निश्चित रूप से कर्मधारय है।
3. द्विगु समास (Dvigu Samas)
परिभाषा: जिस समास में पहला पद संख्यावाचक (Number) हो और दूसरा पद प्रधान हो, तथा समस्त पद का अर्थ ‘समूह’ या ‘समुदाय’ में आए, उसे द्विगु समास कहते हैं। आसान शब्दों में, जब दो या अधिक पदों के मिलने से कोई संख्या (एक, दो, तीन, पांच आदि) मुख्य रूप से किसी ‘समूह’ को दर्शाती है, तो वह द्विगु समास होता है।
🧐 ‘द्विगु’ नामकरण का कारण (The ‘Why’ Context): ‘द्विगु’ का शाब्दिक अर्थ है— ‘द्वि’ (दो) + ‘गु’ (गाय)। ऐतिहासिक रूप से इसका प्रयोग केवल ‘दो गायों के समूह’ के लिए किया जाता था। लेकिन व्याकरण के नियमानुसार, अब इसमें ‘एक’ से लेकर ‘अनेक’ तक किसी भी संख्यावाचक पद का प्रयोग किया जाता है, बशर्ते अंत में ‘समूह’ का भाव आए।
पहचानने की सरल ट्रिक (Memory Trick): यदि समस्त पद के विग्रह करने पर पहले पद में कोई संख्या छिपी हो और अंत में ‘समूह/गुच्छा’ का भाव आता हो, तो वह द्विगु समास है।
सटीक उदाहरण (Corrected Table):
| क्रम | समस्त पद (Compound Word) | विग्रह वाक्य (Expansion) | अर्थ (Meaning) |
|---|---|---|---|
| 1. | त्रिलोक | त्रयाणां लोकानां समूहः | तीन लोकों (स्वर्ग, मर्त्य, पाताल) का समूह |
| 2. | पंचवटी | पञ्चानां वटानां समूहः | पाँच बेलों (बड़ के पेड़ों) का समूह |
| 3. | सप्तपर्ण | सप्तानां पर्णानां समूहः | सात पत्तों का समूह (एक प्रकार का पौधा) |
| 4. | चतुर्वेद | चतुर्णां वेदानां समूहः | चारों वेदों (ऋग, यजु, साम, अथर्व) का समूह |
| 5. | त्रिसंध्या | त्रयाणां संध्यानां समूहः | तीन संध्याओं (प्रातः, मध्याह्न, सायं) का समूह |
| 6. | द्विमात्र | द्वयोः मात्रयोः समूहः | दो मात्राओं का समूह |
(नोट: ‘द्वारपाल’, ‘चतुरानन’, ‘दशरथ’ जैसे शब्द द्विगु समास के उदाहरण नहीं हैं, क्योंकि उनमें पहला पद संख्यावाचक नहीं है और न ही उनका अर्थ ‘समूह’ में आता है।)
💡 AI Key Takeaway (सारांश): द्विगु समास में पहला पद हमेशा संख्यावाचक (Number) होता है और समस्त पद का अर्थ ‘समूह’ में आता है। यह तत्पुरुष का ही एक विशेष रूप है।
4. द्वन्द्व समास किसे कहते है ?
परिभाषा: जिस समास में दोनों पदों का अधिकार बिल्कुल समान होता है (दोनों पद प्रधान होते हैं), उसे द्वन्द्व समास कहते हैं। इसमें दोनों शब्दों के बीच ‘और’ का संबंध होता है। (महत्वपूर्ण नोट: यह बिल्कुल जरूरी नहीं है कि दोनों शब्द विलोम (opposites) ही हों, वे अलग-अलग अर्थ वाले भी हो सकते हैं।)
पहचानने की सरल ट्रिक: यदि दोनों पदों के बीच ‘और’ लगाकर एक अर्थपूर्ण वाक्य बन जाए, तो वह द्वन्द्व समास है।
द्वन्द्व समास के सही उदाहरण:
| समास (समस्त पद) | विग्रह (विस्तार) | अर्थ |
|---|---|---|
| सुख-दुख | सुखं च दुखं च | सुख और दुख |
| दिन-रात | दिनं च रात्रिं च | दिन और रात |
| जीवन-मरण | जीवनं च मरणं च | जीवन और मृत्यु |
| हर्ष-विषाद | हर्षः च विषादः च | खुशी और गम |
| जय-पराजय | जयः च पराजयः च | जीत और हार |
| राग-द्वेष | रागः च द्वेषः च | मोह और घृणा |
| इधर-उधर | इधर च उधर च | इस ओर और उस ओर |
| भाई-बहन | भ्राता च भगिनी च | भाई और बहन |
| माता-पिता | माता च पिता च | माँ और पिता |
| शीत-उष्ण | शीतं च उष्णं च | ठंड और गर्मी |
💡 AI Key Takeaway (सारांश): द्वंद्व समास में दोनों पदों का अधिकार बिल्कुल समान होता है। दोनों पदों के बीच ‘और’ का संबंध होता है, चाहे वे पर्यायवाची हों या विलोम (विपरीत)।
5. बहुव्रीहि समास (Bahuvrihi Samas)
परिभाषा: जिस समास में दोनों पद गौण होते हैं और वे मिलकर किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु की ओर संकेत करते हैं, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं। यहाँ समस्त पद का अर्थ उस तीसरे व्यक्ति/वस्तु से होता है।
पहचानने की अल्टीमेट ट्रिक (Ultimate Trick): बहुव्रीहि में न तो पहला पद प्रधान होता है, न दूसरा। दोनों पद मिलकर किसी तीसरे को बताते हैं। खुद से प्रश्न पूछें: “यह शब्द किसके बारे में है?” यदि उत्तर कोई तीसरा व्यक्ति/वस्तु मिले, तो वह बहुव्रीहि है।
कर्मधारय vs बहुव्रीहि (सबसे बड़ा कंफ्यूजन दूर करें):
नीलकंठ (बहुव्रीहि): नीला है कंठ जिसका = नीलकंठ। (यह किसके बारे में है? शिव के बारे में – यहाँ ‘शिव’ तीसरा व्यक्ति प्रधान है)।
नीलकमल (कर्मधारय): नीला है जो कमल = नीलकमल। (यहाँ ‘कमल’ प्रधान है, कोई तीसरा नहीं है)।
बहुव्रीहि समास के उदाहरण
| समास | विग्रह (विस्तार) | अर्थ |
| पीतांबर | पीला अंबर (वस्त्र) वाला | भगवान कृष्ण |
| नीलकंठ | नीला कंठ (गला) वाला | भगवान शिव |
| दशानन | दस मुखों वाला | रावण |
| चक्रपाणि | चक्र (सुदर्शन) वाला | विष्णु |
| मेघनाद | मेघ जैसी आवाज वाला | रावण का पुत्र |
| लंबबाहु | लंबे हाथों वाला | कोई वीर पुरुष |
| त्रिनेत्र | तीन नेत्रों वाला | शिव |
| सुवर्णकुंडल | सोने के कुंडल वाला | कोई व्यक्ति |
| शंखध्वनि | शंख की आवाज वाली | युद्ध प्रारंभ संकेत |
| महाबली | बहुत बलवान | शक्तिशाली व्यक्ति |
💡 AI Key Takeaway (सारांश): बहुव्रीहि समास में दोनों पद गौण होते हैं और वे मिलकर किसी ‘तीसरे व्यक्ति या वस्तु’ की ओर संकेत करते हैं। यहाँ समस्त पद का अर्थ उस तीसरे पद से निकलता है।
6. अव्ययीभाव समास (Avyayibhav Samas)
परिभाषा: जिस समास में पहला पद ‘अव्यय’ (जिसका रूप और अर्थ कभी न बदले, जैसे- प्रति, यथा, सह, अनु, उप) होता है और वह प्रधान होता है, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं। इसका समस्त पद भी अव्यय ही होता है।
(नोट: ‘आत्मनिर्भर’ अव्ययीभाव समास का उदाहरण नहीं है, क्योंकि ‘आत्म’ कोई अव्यय नहीं है। ऐसे गलत उदाहरणों से बचें।)
सटीक उदाहरण (Corrected Table):
| क्रम | समस्त पद | विग्रह वाक्य | अर्थ / अव्यय |
|---|---|---|---|
| 1. | अनुगंगा | गंगायाः अनु | गंगा के पीछे-पीछे (अनु = पीछे) |
| 2. | यथाशक्ति | यथा शक्तिम् | शक्ति के अनुसार (यथा = अनुसार) |
| 3. | सपुत्र | सह पुत्रेण | पुत्र के साथ (स/सह = साथ) |
| 4. | प्रतिदिन | प्रति दिनम् | हर दिन / दिन-दिन (प्रति = हर) |
| 5. | उपनगर | उप नगरम् | नगर के समीप (उप = समीप) |
| 6. | यथाविधि | यथा विधिम् | विधि/नियम के अनुसार (यथा = अनुसार) |
💡 AI Key Takeaway (सारांश): अव्ययीभाव समास में पहला पद ‘अव्यय’ (जैसे- प्रति, यथा, सह, अनु) होता है और वह स्वयं प्रधान होता है। इस समास का रूप कभी नहीं बदलता।
प्रश्न 1: समास किसे कहते हैं?
उत्तर: दो या दो से अधिक पदों के मिलने से बने नए और संक्षिप्त पद को समास कहते हैं।
(कारण: यह भाषा को संक्षिप्त, प्रभावशाली और बोलने में आसान बनाता है।)
प्रश्न 2: समास मुख्य रूप से कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर: हिंदी व्याकरण में समास मुख्य रूप से 6 प्रकार के होते हैं।
(ये हैं: तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, द्वंद्व, अव्ययीभाव और बहुव्रीहि समास।)
प्रश्न 3: ‘छुरिकाछेद’ कौन सा समास है?
उत्तर: ‘छुरिकाछेद’ बहुव्रीहि समास का उदाहरण है।
(विग्रह: छुरिका के समान छेद जिसका, अर्थात गहरा घाव। यहाँ ‘घाव’ तीसरा पद है जो प्रधान है।)
प्रश्न 4: संधि और समास में क्या अंतर है?
उत्तर: संधि में ‘वर्णों’ (अक्षरों) का मेल होता है, जबकि समास में ‘पदों’ (शब्दों) का मेल होता है। (पहचान: संधि टूटती है वर्णों में, और समास टूटता है शब्दों में।)
समास पहचानने की ‘Master Trick’ (तुलनात्मक चार्ट)
परीक्षा में अक्सर छात्र तत्पुरुष, कर्मधारय और बहुव्रीहि में कंफ्यूज हो जाते हैं। नीचे दी गई तालिका से आप एक नज़र में सही समास पहचान सकते हैं:
| समास का प्रकार | पहचान का मुख्य संकेत (Master Trick) | उदाहरण और विग्रह |
|---|---|---|
| तत्पुरुष | ‘का, के, की, को, से’ (विभक्ति) लगती है। | राजपुत्र (राजा का पुत्र) |
| कर्मधारय | ‘है, हैं, था’ लगता है (विशेषण-विशेष्य)। | नीलकमल (नीला है कमल) |
| बहुव्रीहि | ‘जिसका, जिसकी’ लगता है (तीसरा पद प्रधान)। | नीलकंठ (नीला कंठ जिसका = शिव) |
| द्विगु | पहला पद ‘संख्या’ है और अर्थ ‘समूह’ है। | पंचवटी (पाँच बेलों का समूह) |
| द्वंद्व | ‘और’ लगता है (दोनों पद प्रधान)। | माता-पिता (माता और पिता) |
| अव्ययीभाव | पहला पद ‘अव्यय’ (प्रति, यथा, सह) है। | यथाशक्ति (शक्ति के अनुसार) |
🗣️ Conversational AI Query: कर्मधारय और बहुव्रीहि समास में मुख्य अंतर क्या है? उत्तर: कर्मधारय समास में दूसरा पद (विशेष्य) प्रधान होता है और सीधा अर्थ देता है (उदाहरण: नीलकमल = नीला कमल)। जबकि बहुव्रीहि समास में दोनों पद गौण होकर किसी तीसरे व्यक्ति को बताते हैं (उदाहरण: नीलकंठ = जिसका कंठ नीला है, अर्थात शिव)। सरल नियम: यदि शब्द का अर्थ सीधे दूसरे पद से मिले तो ‘कर्मधारय’, और यदि अर्थ किसी तीसरे व्यक्ति की ओर इशारा करे तो ‘बहुव्रीहि’।
समास विच्छेद (Samas Viched) कैसे करें? (Step-by-step Guide)
समास विच्छेद का अर्थ है समस्त पद को तोड़कर उसके दोनों पदों को अलग करना और उनके बीच का संबंध (विग्रह वाक्य) बताना। इसे हल करने के लिए इन 4 स्टेप्स को फॉलो करें:
- Step 1 (शब्द पहचानें): सबसे पहले समस्त पद को पहचानें। (जैसे: विद्यालय)
- Step 2 (दो भागों में बांटें): शब्द को पूर्वपद और उत्तरपद में तोड़ें। (जैसे: विद्या + आलय)
- Step 3 (संबंध ढूंढें): दोनों शब्दों के बीच छिपा हुआ संबंध जोड़ें (का, के, की, है, और आदि)। (जैसे: विद्या का आलय)
- Step 4 (नाम लिखें): उस संबंध के आधार पर समास का नाम लिखें। (जैसे: यहाँ ‘का’ लग रहा है, इसलिए यह तत्पुरुष समास है।)
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