Learn "क्रिया किसे कहते हैं?" with simple explanations and examples. Understand the definition of Kriya (Verb), its types, usage, and importance in Hindi grammar for students, beginners, and competitive exam preparation.
Table of Contents
क्रिया (Verb) किसे कहते हैं? परिभाषा, भेद, उदाहरण और ट्रिक्स (Complete Guide)
हिंदी व्याकरण (Hindi Vyakaran) में ‘क्रिया‘ (Verb) वाक्य की रीढ़ की हड्डी होती है। बिना क्रिया के कोई भी वाक्य पूर्ण नहीं माना जा सकता। NCERT हिंदी व्याकरण (NCERT Hindi Grammar) की कक्षा 6 से 12 तक की पुस्तकों और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में ‘क्रिया‘ और ‘क्रिया के भेद‘ से संबंधित प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।
यदि आप भी ‘क्रिया क्या होती है’, ‘क्रिया की पहचान कैसे करें‘ और ‘क्रिया के भेद व उनके उदाहरण‘ को लेकर भ्रमित हैं, तो यह विस्तृत मार्गदर्शिका विशेष रूप से आपके लिए है। इस लेख में हम क्रिया की परिभाषा, इसके नियम और सरल ट्रिक्स के माध्यम से हर अवधारणा को आसान भाषा में समझेंगे।
विशेषज्ञ समीक्षा और पाठ्यक्रम संरेखण (Expert Review & Syllabus Alignment) यह लेख हिंदी व्याकरण के विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) द्वारा सख्ती से सत्यापित (Verified) किया गया है। इसमें दी गई सभी परिभाषाएं, नियम और उदाहरण NCERT (कक्षा 6, 8, और 10) की मानक हिंदी व्याकरण पुस्तकों के पूर्णतः अनुरूप हैं। यह विस्तृत मार्गदर्शिका न केवल CBSE और राज्य बोर्ड की परीक्षाओं, बल्कि NDA, SSC, और State PSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी अत्यंत उपयोगी और प्रमाणिक है।
इस विस्तृत मार्गदर्शिका में आप निम्नलिखित महत्वपूर्ण अवधारणाओं को सरलता से समझेंगे:
- क्रिया की व्याकरणिक परिभाषा: मानक हिंदी व्याकरण के अनुसार क्रिया का अर्थ और इसके मूल गुण।
- क्रिया की पहचान करने की ट्रिक्स (Tricks): किसी भी वाक्य में बिना भ्रम के तुरंत क्रिया (Verb) खोजने के सरल और प्रैक्टिकल तरीके।
- क्रिया के भेद और उनके उदाहरण: सकर्मक, अकर्मक, प्रेरणार्थक आदि भेदों का विस्तृत वर्गीकरण और सरल उदाहरण।
- छात्रों द्वारा की जाने वाली सामान्य गलतियां: परीक्षाओं में क्रिया से जुड़े प्रश्नों को हल करते समय छात्र अक्सर क्या गलतियां करते हैं और उनसे कैसे बचें।
- क्रिया और काल का संबंध: वाक्य में क्रिया के आधार पर काल (Tense) की सटीक पहचान कैसे करें।
क्रिया के भेद: एक नज़र में (Visual Flowchart)
हिंदी व्याकरण में क्रिया के भेदों को समझना कभी-कभी थोड़ा उलझन भरा हो सकता है। नीचे दिया गया सरल चार्ट (Flowchart) आपको पूरी इकाई का ‘बड़ा चित्र’ (Big Picture) एक ही नज़र में समझने में मदद करेगा:

चार्ट का उपयोग कैसे करें?
- यदि वाक्य में कर्म (Object) है ➔ तो क्रिया सकर्मक होगी।
- यदि कर्म दो हैं ➔ तो वह द्विकर्मक होगी।
- यदि वाक्य में दो क्रियाएं मिलकर काम कर रही हैं ➔ तो वह संयुक्त होगी।
- यदि क्रिया किसी संज्ञा (Name) से बनी है ➔ तो वह नामधातु होगी।
क्रिया क्या होती है? क्रिया की परिभाषा | (Kriya Ka Hoti Hai, Kriya Ki Paribhasha)
हिंदी व्याकरण में ‘क्रिया’ की परिभाषा को लेकर प्रमुख व्याकरणकार्यों ने स्पष्ट मत व्यक्त किए हैं। परीक्षाओं में मानक परिभाषा लिखना अत्यंत आवश्यक है।
आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार: “जिस शब्द या वाक्यांश से किसी कार्य के करने, सहने या होने का बोध हो, उसे क्रिया कहते हैं।”
सरल और प्रैक्टिकल परिभाषा: आसान शब्दों में, वाक्य का वह भाग जो हमें बताता है कि कोई व्यक्ति, जीव या वस्तु क्या कर रही है, क्या कर रही थी, या क्या करेगी, क्रिया (Verb) कहलाती है। यह वाक्य की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है, क्योंकि इसके बिना वाक्य का कोई पूर्ण अर्थ नहीं निकलता।
उदाहरण सहित स्पष्टीकरण:
- राम सेव खाता है। (यहाँ ‘खाता’ शब्द कार्य करने का बोध करा रहा है, अतः यह क्रिया है।)
- बच्चे मैदान में खेलेंगे। (यहाँ ‘खेलेंगे’ शब्द भविष्य में होने वाले कार्य को दर्शाता है।)
- घड़ी में समय हो रहा है। (यहाँ ‘हो रहा’ शब्द किसी अवस्था या होने का बोध कराता है।)
वाक्य में क्रिया (Verb) की पहचान कैसे करें? (प्रेक्टिकल ट्रिक)
केवल परिभाषा रटना पर्याप्त नहीं है; परीक्षा में अक्सर जटिल वाक्य दिए जाते हैं जहाँ से क्रिया खोजना छात्रों के लिए कठिन हो जाता है। किसी भी वाक्य में क्रिया को तुरंत और सटीक रूप से पहचानने के लिए आप ‘प्रश्न पूछने की विधि’ (Questioning Trick) का उपयोग कर सकते हैं।
क्रिया पहचानने का 3-स्टेप फॉर्मूला:
- कर्ता (Subject) खोजें: सबसे पहले वाक्य में देखें कि काम कौन कर रहा है या किसके बारे में बात हो रही है।
- कर्ता से प्रश्न पूछें: कर्ता के ठीक बाद “क्या कर रहा है?”, “क्या कर रहा था?”, “क्या करेगा?” या “क्या हो रहा है?” लगाकर पूछें।
- जो उत्तर आए, वही क्रिया है: प्रश्न का जो हिस्सा उस कार्य या अवस्था को दर्शाए, वही उस वाक्य की क्रिया होती है।
उदाहरण से समझें:
- वाक्य: “छात्र परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।”
- Step1 (कर्ता): छात्र
- Step 2 (प्रश्न): छात्र क्या कर रहे हैं?
- Step 3 (उत्तर/क्रिया): परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। (यहाँ ‘कर रहे हैं’ क्रिया है)।
- वाक्य: “सूरज पूर्व दिशा से उगता है।”
- Step1 (कर्ता): सूरज
- Step 2 (प्रश्न): सूरज क्या करता है?
- Step 3 (उत्तर/क्रिया): पूर्व दिशा से उगता है। (यहाँ ‘उगता है’ क्रिया है)।
यह सरल ट्रिक जटिल वाक्यों में भी सकर्मक और अकर्मक क्रिया की पहचान करने में आपकी बहुत मदद करेगी और परीक्षा में आपके समय की बचत करेगी।
क्रिया का मूल रूप (धातु)
हिंदी व्याकरण में क्रिया के सबसे मूल और अविकल रूप को ‘धातु’ (Root) कहते हैं। धातु वह स्थिर रूप है जिसमें काल या पुरुष के अनुसार कोई भी परिवर्तन नहीं हुआ होता। जब हम किसी क्रिया से उसका प्रत्यय (जैसे- ‘ना’) हटा देते हैं, तो हमें क्रिया का मूल रूप यानी धातु प्राप्त होती है।
धातु निकालने का सरल सूत्र (Formula):
क्रिया – ‘ना’ = धातु (उदाहरण: पढ़ना – ना = पढ़ | खेलना – ना = खेल)
इसे आप इस प्रकार भी याद रख सकते हैं:
धातु + ‘ना’ = क्रिया (उदाहरण: पढ़ + ना = पढ़ना | खेल + ना = खेलना)
⚠️ विशेष सावधानी (अक्सर होने वाली गलतियां): धातु निकालते समय कई बार छात्र शब्द को बहुत अधिक काट देते हैं या गलत रूप निकाल लेते हैं। हमेशा यह ध्यान रखें कि धातु का अपना एक स्वतंत्र अर्थ होना चाहिए।
- सही: करना ➔ कर (इसका अपना अर्थ है – to do)
- गलत: करना ➔ क (यह केवल एक वर्ण है, इसका कोई अर्थ नहीं है)
- सही: जाना ➔ जा
- गलत: जाना ➔ ज
- पढ़ना → पढ़ (धातु)
- लिखना → लिख (धातु)
- जाना → जा (धातु)
- खाना → खा (धातु)
- देखना → देख (धातु)
इसलिए, क्रिया से केवल ‘ना’ या अन्य प्रत्ययों को ही हटाएं, ताकि धातु का मूल अर्थ बरकरार रहे। यह ट्रिक बोर्ड परीक्षाओं में धातु और प्रत्यय पहचानने वाले प्रश्नों में बहुत काम आती है।
क्रिया और धातु में अंतर (Kriya vs. Dhatu)
अक्सर छात्र ‘क्रिया’ और ‘धातु’ को लेकर भ्रमित हो जाते हैं और परीक्षा में गलत उत्तर लिख देते हैं। आइए एक सरल तालिका के माध्यम से इन दोनों के बीच का स्पष्ट अंतर समझते हैं:
| विशेषता | क्रिया (Verb) | धातु (Root Verb) |
|---|---|---|
| मूल परिभाषा | जिस शब्द से कार्य करने, सहने या होने का बोध हो। | क्रिया का सबसे मूल, अविकल और स्थिर रूप। |
| रूप और परिवर्तन | यह काल (Tense) और पुरुष (Person) के अनुसार बदलती है। | यह सदैव अपने मूल रूप में स्थिर रहती है, इसमें कोई परिवर्तन नहीं होता। |
| प्रत्यय (Suffix) | इसमें ‘ना’, ‘ता’, ‘या’, ‘गा’ आदि प्रत्यय लगे हो सकते हैं। | इससे सभी प्रत्यय हटा दिए जाते हैं। यह केवल शुद्ध शब्द होती है। |
| वाक्य में स्थिति | यह वाक्य में काल और कर्ता के अनुसार विभिन्न रूपों में आती है। | इसका प्रयोग वाक्य में सीधे तौर पर नहीं होता, यह केवल क्रिया का आधार है। |
| उदाहरण | पढ़ना, पढ़ता है, पढ़ेगा, पढ़ा। | पढ़ |
उदाहरण से स्पष्टीकरण (Step-by-Step Breakdown):
- वाक्य: “राम सेव खाता है।”
- क्रिया की पहचान: यहाँ ‘खाता है’ वाक्य में प्रयुक्त हो रही है और कर्ता के कार्य को दर्शा रही है, इसलिए यह क्रिया है।
- धातु की पहचान: यदि हम इस क्रिया से काल और पुरुष के सभी प्रत्यय (‘ता है’) हटा दें, और ‘ना’ भी हटा दें, तो केवल मूल शब्द ‘खा’ रह जाता है। यही ‘खा’ इसकी धातु है।
💡 याद रखने का सरल नियम: हर धातु एक क्रिया है, लेकिन हर क्रिया धातु नहीं होती। जब तक क्रिया अपने सबसे शुद्ध और बिना किसी प्रत्यय वाले रूप में न हो, उसे धातु नहीं माना जाएगा।
क्रिया और क्रियापद में अंतर (Kriya vs. Kriyapad)
अक्सर छात्र ‘क्रिया’ और ‘क्रियापद’ को एक ही समझते हैं, लेकिन हिंदी व्याकरण में दोनों के बीच एक सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण अंतर है।
क्रियापद की परिभाषा: वाक्य में वह शब्द या शब्द-समूह, जो कर्ता के किए गए, किए जाने या होने वाले कार्य का बोध कराता है और वाक्य के अंत में आकर उसे पूर्ण करता है, क्रियापद कहलाता है।
क्रियापद : क्रियापद वह शब्द या शब्दों का वह समूह होता है, जो किसी भी वाक्य में किसी कार्य (action ), अवस्था (Situation), या भाव (feelings ) के होने या किए जाने का बोध कराता है। वाक्य में क्रियापद के बिना अर्थ अधूरा रह जाता है, क्योंकि क्रियापद हमें यह बताता है कि कर्ता (subject) क्या कर रहा है या किस स्थिति में है।
स्पष्टीकरण तालिका (Comparison Table):
| विशेषता | क्रिया (Verb/Action) | क्रियापद (Verb Phrase) |
|---|---|---|
| मूल अर्थ | यह केवल ‘कार्य’ या ‘व्यापार’ का नाम है। | यह वाक्य में कार्य का बोध कराने वाला पद है। |
| रूप | यह आमतौर पर अपने मूल रूप (धातु + ना) में होती है। (उदाहरण: पढ़ना, खाना, जाना) | यह काल और पुरुष के अनुसार परिवर्तित होकर वाक्य में आती है। (उदाहरण: पढ़ता है, खाया, जाएंगे) |
| स्थिति | यह वाक्य में कहीं भी हो सकती है या अकेले भी लिखी जा सकती है। | यह हमेशा वाक्य के अंत में आती है। |
| उदाहरण | ‘दौड़ना’ एक अच्छा व्यायाम है। (यहाँ ‘दौड़ना’ क्रिया है) | राम दौड़ता है। (यहाँ ‘दौड़ता है’ क्रियापद है) |
उदाहरण से समझें: वाक्य: “सीता घर पर खाना बनाती है।”
- क्रिया (Action): बनाना (कार्य का नाम)
- क्रियापद (Function): बनाती है (यह शब्द वाक्य के अंत में है और सीता के कार्य को पूर्ण कर रहा है)।
क्रिया शब्द के कुछ अन्य उदाहरण इस प्रकार है |
पढ़ना, लिखना, खाना, पीना, खेलना, दौड़ना, सोना, बैठना, गाना, चलना ,टहलना , आना, जाना, कूदना, नाचना, तैरना, उड़ना, हँसना, रोना, बैठना, नहाना इत्यादि | ये सभी शब्द क्रिया के उदाहरण हैं, क्योंकि इन शब्दों से हमें किसी कार्य के होने या किए जाने का बोध होता है।

क्रिया के भेद एवं प्रकार |
- कर्म के आधार पर
- प्रयोग या संरचना के आधार पर:
कर्म के आधार पर क्रिया के दो (या तीन) भेद होते हैं-सकर्मक क्रिया, अकर्मक क्रिया (और द्विकर्मक क्रिया)। प्रयोग के आधार पर क्रिया के दो (या अधिक) भेद होते हैं-संयुक्त क्रिया, नामधातु क्रिया आदि।
तो चलिए इन सभी क्रिया को कुछ उदाहरण के साथ विस्तारपूर्वक समझने की कोशिश करते है की akarmak aur sakarmak kriya kya hoti hai ? सबसे पहले हम सकर्मक क्रिया और अकर्मक क्रिया के बारे में विस्तार से पढ़ते है |
सकर्मक क्रिया क्या होती है ?
क्या आप जानते हैं सकर्मक क्रिया क्या होती है? (sakarmak kriya kya hoti hai )इस प्रश्न का उत्तर मैं आपको देता हूँ।
वह क्रिया जिसके द्वारा किए गए कार्य का फल किसी दूसरे को मिले, या जिस क्रिया का अर्थ पूर्ण होने के लिए किसी कर्म (Object) की आवश्यकता हो, सकर्मक क्रिया कहलाती है। सरल शब्दों में, यदि क्रिया के बाद “क्या” या “किसको” का उत्तर मिल जाए, तो वह सकर्मक होती है।
पहचानने की ट्रिक (Identification Trick): किसी भी वाक्य में सकर्मक क्रिया को पहचानने के लिए क्रिया (Verb) से “क्या?” या “किसको?” प्रश्न करें।
- यदि प्रश्न का उत्तर मिल जाए ➔ सकर्मक क्रिया
- यदि प्रश्न का उत्तर न मिले ➔ अकर्मक क्रिया
उदाहरण सहित स्पष्टीकरण:
- वाक्य: “राम भोजन खाता है।”
- क्रिया: खाता है
- प्रश्न: क्या खाता है?
- उत्तर: भोजन (कर्म)
- निष्कर्ष: चूंकि प्रश्न का उत्तर मिल गया, अतः ‘खाता है’ सकर्मक क्रिया है।
- वाक्य: “वह गरीबों की मदद करता है।”
- क्रिया: करता है
- प्रश्न: किसकी मदद करता है?
- उत्तर: गरीबों की (कर्म)
- निष्कर्ष: उत्तर मिलने पर यह सकर्मक क्रिया सिद्ध होती है।
- वाक्य: “लड़का पत्र लिखता है।”
- क्रिया: लिखता है
- प्रश्न: क्या लिखता है?
- उत्तर: पत्र
- निष्कर्ष: यह भी एक सकर्मक क्रिया है।
सकर्मक क्रिया के उदाहरण और वाक्य विश्लेषण (Advanced Examples)
केवल परिभाषा रटना पर्याप्त नहीं है। परीक्षाओं में अक्सर जटिल वाक्य दिए जाते हैं जहाँ कर्म (Object) की पहचान करना थोड़ा कठिन हो सकता है। नीचे 5 महत्वपूर्ण उदाहरण दिए गए हैं जो स्पष्ट करते हैं कि वाक्य में सकर्मक क्रिया और उसके कर्म की पहचान कैसे करें:
1. सरल उदाहरण (Simple Object):
- वाक्य: “राम सेव खाता है।”
- विश्लेषण:
- क्रिया: खाता है
- प्रश्न: क्या खाता है?
- उत्तर (कर्म): सेव
- निष्कर्ष: ‘खाता है’ सकर्मक क्रिया है क्योंकि इसका कर्म ‘सेव’ है।
2. भाववाच्य कर्म (Abstract Object):
- वाक्य: “बड़े-बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए।”
- विश्लेषण:
- क्रिया: करनी चाहिए
- प्रश्न: किसका सम्मान करना चाहिए?
- उत्तर (कर्म): बड़े-बुजुर्गों का
- निष्कर्ष: यहाँ कर्म कोई भौतिक वस्तु नहीं, बल्कि एक भाव है, फिर भी क्रिया सकर्मक है।
3. अपादान कारक जैसा प्रतीत होने वाला वाक्य:
- वाक्य: “वह मुझसे एक प्रश्न पूछता है।”
- विश्लेषण:
- क्रिया: पूछता है
- प्रश्न: क्या पूछता है?
- उत्तर (कर्म): एक प्रश्न
- निष्कर्ष: यहाँ ‘मुझसे’ कारक है, लेकिन मुख्य कर्म ‘प्रश्न’ है। अतः यह सकर्मक है।
4. द्वंद समास युक्त वाक्य:
- वाक्य: “सत्य और अहिंसा का मार्ग अपनाना चाहिए।”
- विश्लेषण:
- क्रिया: अपनाना चाहिए
- प्रश्न: क्या अपनाना चाहिए?
- उत्तर (कर्म): सत्य और अहिंसा का मार्ग
- निष्कर्ष: ‘अपनाना’ एक सकर्मक क्रिया है।
5. जटिल वाक्य (Complex Sentence):
- वाक्य: “शिक्षक ने अनुशासनहीन छात्रों को दंड दिया।”
- विश्लेषण:
- क्रिया: दंड दिया
- प्रश्न: दंड किसे दिया? (या क्या दिया?)
- उत्तर (कर्म): छात्रों को
- निष्कर्ष: ‘दंड दिया’ सकर्मक क्रिया है।
इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि चाहे कर्म व्यक्ति हो, वस्तु हो, या कोई भाव हो—यदि क्रिया से ‘क्या’ या ‘किसको’ का प्रश्न पूछा जा सके, तो वह क्रिया निश्चित रूप से सकर्मक होगी।
अकर्मक क्रिया क्या होती है ?
अब हम जानेंगे की अकर्मक क्रिया किसे कहते है(akarmak kriya kya hoti hai) | वह क्रिया जिसके द्वारा किए गए कार्य का फल किसी दूसरे को न मिले, या जिस क्रिया का अर्थ पूर्ण होने के लिए किसी कर्म (Object) की आवश्यकता न हो, अकर्मक क्रिया कहलाती है।
पहचानने की ट्रिक (Identification Trick): किसी भी वाक्य में अकर्मक क्रिया को पहचानने के लिए क्रिया (Verb) से “क्या?” या “किसको?” प्रश्न करें।
- यदि प्रश्न का उत्तर न मिले ➔ अकर्मक क्रिया
- (यदि उत्तर मिल जाए, तो वह सकर्मक होगी, जैसा हमने पिछले भाग में पढ़ा)।
बोर्ड परीक्षाओं में महत्व: CBSE और राज्य स्तरीय बोर्ड परीक्षाओं में अक्सर ‘सकर्मक और अकर्मक क्रिया में अंतर’ या ‘वाक्य में अकर्मक क्रिया पहचानने’ पर सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं। इसलिए, केवल परिभाषा रटना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इस ट्रिक का अभ्यास करना अत्यंत आवश्यक है।
उदाहरण सहित स्पष्टीकरण:
निष्कर्ष: ‘उगता है’ अकर्मक क्रिया है। इसके कुछ अन्य उदाहरण इस प्रकार है जैसे :, हँसना, सोना, रोना, बैठना,दौड़ना, उड़ना, डरना, चमकना, बढ़ना, चमकना आदि।
वाक्य: “राम सोता है।”
क्रिया: सोता है
प्रश्न: क्या सोता है? / किसे सोता है?
उत्तर: कोई उत्तर नहीं मिलता।
निष्कर्ष: अतः ‘सोता है’ अकर्मक क्रिया है।
वाक्य: “बच्चे पार्क में खेलते हैं।”
क्रिया: खेलते हैं
प्रश्न: क्या खेलते हैं?
उत्तर: कोई उत्तर नहीं (यहाँ ‘पार्क में’ स्थान बता रहा है, कर्म नहीं)।
निष्कर्ष: ‘खेलते हैं’ अकर्मक क्रिया है।
वाक्य: “सूरज पूर्व से उगता है।”
क्रिया: उगता है
प्रश्न: क्या उगता है?
उत्तर: कोई उत्तर नहीं।
द्विकर्मक क्रिया क्या होती है ? (Double Transitive Verb)
वैसे तो सकर्मक क्रिया के मुख्य रूप से दो भाग है परन्तु इसका एक और भाग है जिसे हम द्विकर्मक क्रिया कहते है | द्विकर्मक क्रिया का अर्थ है जिसमे दो क्रियाए हो | द्विकर्मक क्रिया वह क्रिया होती है जिसमे जिसमें एक ही वाक्य में दो कर्म होते है जिसमे एक प्राणीवाचक (living thing ) और दूसरा निर्जीव (non-living thing ) होते है जैसे :
व्याकरण में इन दो कर्मों को स्पष्ट रूप से बांटा गया है:
- प्रथम कर्म (Direct Object): यह आमतौर पर कोई व्यक्ति (Living being) होता है। (इससे क्रिया से ‘किसे’ या ‘किसको’ प्रश्न पूछा जाता है)।
- द्वितीय कर्म (Indirect Object): यह आमतौर पर कोई वस्तु (Non-living thing) होती है। (इससे क्रिया से ‘क्या’ प्रश्न पूछा जाता है)।
द्विकर्मक क्रिया पहचानने की ट्रिक: वाक्य में क्रिया से दो प्रश्न पूछें:
- पहले “किसे?” पूछें ➔ उत्तर में व्यक्ति आए (प्रथम कर्म)।
- फिर “क्या?” पूछें ➔ उत्तर में वस्तु आए (द्वितीय कर्म)। यदि दोनों प्रश्नों के उत्तर मिल जाएं, तो वह क्रिया निश्चित रूप से द्विकर्मक है।
सकर्मक और द्विकर्मक में अंतर (Comparison Table):
| विशेषता | सकर्मक क्रिया (Transitive) | द्विकर्मक क्रिया (Double Transitive) |
|---|---|---|
| कर्म की संख्या | 1 (एक) | 2 (दो) |
| प्रथम कर्म (व्यक्ति) | नहीं होता | होता है |
| द्वितीय कर्म (वस्तु) | नहीं होता | होता है |
| उदाहरण | राम सेव खाता है। (केवल ‘सेव’ वस्तु है) | राम ने मुझे सेव दिए। (व्यक्ति + वस्तु दोनों हैं) |
उदाहरण सहित वाक्य विश्लेषण:
- वाक्य: “शिक्षक ने छात्रों को पुरस्कार दिए।”
- क्रिया: दिए (द्विकर्मक)
- प्रश्न 1: किसे दिए? ➔ छात्रों को (प्रथम कर्म / व्यक्ति)
- प्रश्न 2: क्या दिए? ➔ पुरस्कार (द्वितीय कर्म / वस्तु)
- वाक्य: “माँ ने मुझे मिठाई खिलाई।”
- क्रिया: खिलाई (द्विकर्मक)
- प्रश्न 1: किसे खिलाई? ➔ मुझे (प्रथम कर्म)
- प्रश्न 2: क्या खिलाई? ➔ मिठाई (द्वितीय कर्म)
- वाक्य: “उसने गरीबों को कंबल बांटे।”
- क्रिया: बांटे (द्विकर्मक)
- प्रश्न 1: किसे बांटे? ➔ गरीबों को (प्रथम कर्म)
- प्रश्न 2: क्या बांटे? ➔ कंबल (द्वितीय कर्म)
💡 याद रखने योग्य प्रमुख द्विकर्मक क्रियाएं: पढ़ाना, लिखाना, बताना, देना, खिलाना, पीलाना, चुगलाना, सिखाना, नहलाना आदि। परीक्षा में इन क्रियाओं को देखते ही समझ जाएं कि ये द्विकर्मक हैं।
संरचना या प्रयोग के आधार पर क्रिया के भेद जानिए |
वैसे तो संरचना या प्रयोग के आधार पर क्रिया के कई भेद है परन्तु आज हम इसके दो सबसे महत्वपूर्ण भेदों के बारे में पड़ेंगे |
- संयुक्त क्रिया
- नामधातु क्रिया
यह दो क्रिया सबसे महत्वपूर्ण है और इसके कुछ अन्य क्रिया कुछ इस प्रकार है |
- प्रेरणार्थक क्रिया
- पूर्वकालिक क्रिया
- मूल क्रिया
- सहायक क्रिया
- सजातीय क्रिया
- समस्त क्रिया
- सामान्य क्रिया
संयुक्त क्रिया (sanyukt kriya kya hoti hai):
जब किसी वाक्य में अर्थ को पूर्ण करने के लिए दो या दो से अधिक क्रियाओं का एक साथ प्रयोग किया जाता है, तो उसे संयुक्त क्रिया कहते हैं।
व्याकरणिक संरचना (Grammatical Structure): संयुक्त क्रिया में हमेशा दो अलग-अलग प्रकार की क्रियाएं आपस में जुड़ती हैं:
- मुख्य क्रिया (Main Verb / Mutable): यह क्रिया परिवर्तनशील होती है और वाक्य का मुख्य कार्य या अर्थ बताती है।
- सहायक या गौण क्रिया (Helping Verb / Immutable): यह क्रिया अपरिवर्तनशील होती है। इसका कोई स्वतंत्र अर्थ नहीं होता, बल्कि यह मुख्य क्रिया की काल (Tense), वचन, या कार्य की पूर्णता (Completion) को स्पष्ट करती है।
संयुक्त क्रिया का सूत्र:
सहायक क्रिया + मुख्य क्रिया = संयुक्त क्रिया
उदाहरण सहित स्पष्टीकरण:
- वाक्य: “राम रोटी खा गया।”
- विश्लेषण: यहाँ ‘खा’ मुख्य क्रिया है (कार्य का अर्थ बता रही है) और ‘गया’ सहायक क्रिया है (कार्य की पूर्णता और भूतकाल बता रही है)। दोनों मिलकर ‘खा गया’ संयुक्त क्रिया बनाते हैं।
- वाक्य: “लड़का अचानक दौड़ उठा।”
- विश्लेषण: यहाँ ‘दौड़’ मुख्य क्रिया है और ‘उठा’ सहायक क्रिया है, जो कार्य के अचानक शुरू होने (आरंभ) को दर्शाती है।
संयुक्त क्रिया के प्रमुख प्रकार: परीक्षाओं में संयुक्त क्रिया को अक्सर इसके भेदों के आधार पर पहचाना जाता है:
विधिबोधक (Indicates Manner/State): गया, आया, पड़ा। (उदा: सही कहा गया, गलत लिखा गया)क्त क्रिया (खा लिया) बना रही हैं, जिससे हमें यह पता चलता है कि मोहन ने खाना पूरा कर लिया है। इसीलिए इसे संयुक्त क्रिया कहते हैं।
पूर्णताबोधक (Indicates Completion): गया, पड़ा, आया, चुका। (उदा: पढ़ गया, सो पड़ा)
आरंभबोधक (Indicates Beginning): उठा, पड़ा, चला। (उदा: हँस उठा, दौड़ चला)
नामधातु क्रिया (Naam Dhatu Kriya Kya Hoti Hai)
संयुक्त क्रिया के बाद हम नामधातु क्रिया के बारे में समझते है | वह क्रिया जो संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण में प्रत्यय (जैसे- ‘ना’, ‘इया’, ‘आना’ आदि) जोड़कर बनाई जाती है, उसे नामधातु क्रिया कहते हैं। वैसे तो क्रियाओं का निर्माण धातु से होता है, लेकिन जब किसी क्रिया का निर्माण धातु के बजाय किसी नाम (संज्ञा), सर्वनाम या विशेषण से किया जाए, तो उसे नामधातु क्रिया कहते हैं |
or
हिंदी व्याकरण में जब किसी संज्ञा (Noun) से क्रिया का अर्थ निकलता है, तो उसे नामधातु क्रिया कहते हैं।
यह ‘नामधातु’ क्यों कहलाती है? ‘नाम’ का अर्थ है संज्ञा (Noun) और ‘धातु’ का अर्थ है मूल क्रिया (Root Verb)। सरल शब्दों में, जब हम किसी नाम (संज्ञा) को धातु (क्रिया) के रूप में उपयोग करने लगते हैं, तो वह नामधातु क्रिया बन जाती है।
गठन का सूत्र:
संज्ञा + प्रत्यय (ना, अना, इयाता आदि) = नामधातु क्रिया
उदाहरण और वास्तविक उपयोग (Real-World Usage): केवल किताबी उदाहरण ही नहीं, बल्कि दैनिक समाचारों और साहित्य में नामधातु क्रियाओं का व्यापक उपयोग होता है:
- गुड़गुड़ाना (गुड़गुड़ + अना):
- प्रयोग: “सुबह की चाय की चुस्कियों के साथ रमेश गुड़गुड़ाता है।”
- (यहाँ ‘गुड़गुड़’ एक ध्वनि/संज्ञा है, जिससे क्रिया बनी है)।
- पत्राचार करना (पत्राचार + करना):
- प्रयोग: “दोनों मित्रों के बीच नियमित पत्राचार होता रहता है।”
- (संज्ञा ‘पत्राचार’ को क्रिया के रूप में प्रयुक्त किया गया है)।
- कामचोरी करना (कामचोर + ई + करना):
- प्रयोग: “कर्मचारियों की कामचोरी करने की आदत से प्रबंधक परेशान हैं।”
- सराहना (सराह + ना):
- प्रयोग: “राष्ट्रपति ने वीर जवानों की सराहना की।” (साहित्यिक और औपचारिक प्रयोग)।
💡 विशेष तथ्य: नामधातु क्रियाएं हिंदी भाषा को अत्यधिक लचीलापन प्रदान करती हैं। जब भी हमें किसी नई वस्तु, भाव या ध्वनि को क्रिया के रूप में व्यक्त करना होता है, तो हम नामधातु का ही सहारा लेते हैं।
भाव-धातु (Bhav-dhatu) और नामधातु में अंतर
जिस प्रकार ‘संज्ञा’ (Noun) से ‘क्रिया’ (Verb) बनाने को नामधातु कहते हैं, ठीक इसके विपरीत, जब किसी ‘धातु’ (मूल क्रिया) से ‘संज्ञा’ का निर्माण होता है, तो उसे भाव-धातु कहते हैं।
सरल शब्दों में, जब क्रिया का प्रयोग किसी काम, व्यापार या भाव के नाम (संज्ञा) के रूप में किया जाता है, तो वह भाव-धातु बन जाती है।
उदाहरण सहित स्पष्टीकरण:
- धातु: पढ़ (मूल क्रिया) ➔ पढ़ना (संज्ञा/भाव-धातु)
- वाक्य: पढ़ना एक अच्छी आदत है।
- (यहाँ ‘पढ़ना’ कोई कार्य नहीं कर रहा है, बल्कि यह एक काम का नाम यानी संज्ञा के रूप में प्रयुक्त हो रहा है)।
- धातु: चल (मूल क्रिया) ➔ चलना (संज्ञा/भाव-धातु)
- वाक्य: सुबह के समय चलना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।
- (यहाँ ‘चलना’ वाक्य का कर्ता या विषय बनकर संज्ञा की तरह काम कर रहा है)।
💡 त्वरित तुलना (Quick Comparison Trick): परीक्षा में इन दोनों में तुरंत अंतर करने के लिए इस सरल सूत्र को याद रखें:
- नामधातु: संज्ञा ➔ क्रिया (उदाहरण: पत्र ➔ पत्राचार करना, गुड़गुड़ ➔ गुड़गुड़ाना)
- भाव-धातु: क्रिया (धातु) ➔ संज्ञा (उदाहरण: पढ़ ➔ पढ़ना, बोल ➔ बोलना, सो ➔ सोना)
क्रिया का हिंदी भाषा में महत्व क्या है ?
हिंदी व्याकरण में ‘क्रिया’ का स्थान सर्वोपरि है। जिस प्रकार शरीर की रीढ़ की हड्डी के बिना शरीर की कल्पना नहीं की जा सकती, उसी प्रकार क्रिया के बिना वाक्य की कल्पना असंभव है। क्रिया न केवल वाक्य को पूर्ण अर्थ प्रदान करती है, बल्कि यह कर्ता, काल और वाक्य के भाव को भी निर्धारित करती है। यदि वाक्य से क्रिया को हटा दिया जाए, तो वह केवल शब्दों का एक बिखरा हुआ समूह रह जाता है, जिससे कोई स्पष्ट कार्य या अवस्था का बोध नहीं होता।
क्रिया वाक्य का अर्थ कैसे बदलती है?
एक ही विषय (कर्ता) के साथ क्रिया या उसके रूप को बदलने से पूरे वाक्य का अर्थ और भाव पूरी तरह बदल जाता है। आइए इसे उदाहरणों से स्पष्ट रूप से समझते हैं:
1. सक्रिय और निष्क्रिय भाव (Active vs. Passive Voice):
- वाक्य 1: “राम सेव खाता है।” (यहाँ राम स्वयं कार्य कर रहा है – यह सक्रिय वाक्य है)
- वाक्य 2: “राम द्वारा सेव खाया गया।” (यहाँ राम पर कार्य का भाव है या सेव को राम द्वारा खाया गया – यह निष्क्रिय/भाववाच्य वाक्य है)
- निष्कर्ष: केवल क्रिया के रूप (‘खाता है’ से ‘खाया गया’) को बदलने से वाक्य का पूरा अर्थ और कर्ता-कर्म का संबंध बदल गया।
2. काल के अनुसार अर्थ में परिवर्तन (Change in Meaning based on Tense):
- वाक्य 1: “वह स्कूल जाता है।” (यह वर्तमान काल या आदत को दर्शाता है)
- वाक्य 2: “वह स्कूल गया।” (यह भूतकाल है, अर्थात कार्य पूर्ण हो चुका है)
- वाक्य 3: “वह स्कूल जाएगा।” (यह भविष्य काल है, अर्थात कार्य अभी होना बाकी है)
इस प्रकार, क्रिया वाक्य की आत्मा है। यह तय करती है कि कोई कार्य हो रहा है, हुआ है, या होगा, तथा वह कार्य किस प्रकार किया जा रहा है। बिना क्रिया के भाषा में विचारों का सटीक आदान-प्रदान असंभव है।
अभ्यास प्रश्न और उत्तरमाला (Practice Questions & Answer Key)
केवल नियम पढ़ना पर्याप्त नहीं है, जब तक कि आप उनका प्रयोग करके न देखें। नीचे दिए गए 5 वाक्यों में से क्रिया (Verb) को पहचानें और यह भी बताएं कि वह सकर्मक, अकर्मक, या द्विकर्मक है।
(नोट: उत्तर और व्याख्या नीचे दी गई है, पहले स्वयं हल करने का प्रयास करें!)
अभ्यास प्रश्न:
- विद्यार्थी ध्यान से पुस्तक पढ़ते हैं।
- सूरज पूर्व दिशा से उगता है।
- शिक्षक ने बालकों को कहानी सुनाई।
- बिल्ली अचानक दौड़ उठी।
- माँ ने बेटे को दूध पिलाया।
उत्तरमाला (Answer Key) और व्याख्या:
1. विद्यार्थी ध्यान से पुस्तक पढ़ते हैं।
- क्रिया: पढ़ते हैं
- भेद: सकर्मक क्रिया
- व्याख्या: क्रिया से ‘क्या?’ पूछने पर उत्तर ‘पुस्तक’ मिलता है, इसलिए यह सकर्मक है।
2. सूरज पूर्व दिशा से उगता है।
- क्रिया: उगता है
- भेद: अकर्मक क्रिया
- व्याख्या: क्रिया से ‘क्या?’ या ‘किसको?’ पूछने पर कोई उत्तर नहीं मिलता। (‘पूर्व दिशा’ क्रिया का कर्म नहीं, बल्कि स्थान बता रहा है)।
3. शिक्षक ने बालकों को कहानी सुनाई।
- क्रिया: सुनाई
- भेद: द्विकर्मक क्रिया
- व्याख्या: यहाँ दो कर्म हैं। ‘किसे सुनाई?’ ➔ बालकों को (प्रथम कर्म) | ‘क्या सुनाई?’ ➔ कहानी (द्वितीय कर्म)।
4. बिल्ली अचानक दौड़ उठी।
- क्रिया: दौड़ उठी
- भेद: संयुक्त क्रिया (अकर्मक)
- व्याख्या: यहाँ ‘दौड़’ मुख्य क्रिया है और ‘उठी’ सहायक क्रिया है (आरंभबोधक संयुक्त क्रिया)। चूंकि इसका कोई कर्म नहीं है, यह अकर्मक है।
5. माँ ने बेटे को दूध पिलाया।
- क्रिया: पिलाया
- भेद: द्विकर्मक क्रिया
- व्याख्या: ‘किसे पिलाया?’ ➔ बेटे को (प्रथम कर्म) | ‘क्या पिलाया?’ ➔ दूध (द्वितीय कर्म)। (याद रखें: खिलाना, पिलाना, पढ़ाना जैसी क्रियाएं हमेशा द्विकर्मक होती हैं)।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
क्रिया (Verb) किसे कहते हैं?
हिंदी व्याकरण में जिस शब्द से किसी कार्य के करने, सहने या होने का बोध हो, उसे क्रिया कहते हैं। यह वाक्य की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है क्योंकि इसके बिना वाक्य का अर्थ पूर्ण नहीं होता। उदाहरण: राम खाता है, पंखा चलता है।
क्रिया के कितने भेद एवं प्रकार होते हैं?
हिंदी व्याकरण में क्रिया को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा गया है: सकर्मक और अकर्मक। इसके अलावा, व्यापक अर्थ में संयुक्त क्रिया, नामधातु क्रिया, और द्विकर्मक क्रिया भी इसके ही प्रमुख प्रकार हैं।
क्रिया के कौन-कौन से प्रकार होते हैं?
मुख्य प्रकार हैं:
1. सकर्मक क्रिया
2. अकर्मक क्रिया
3. द्विकर्मक क्रिया
4. संयुक्त क्रिया
5. नामधातु क्रिया
संरचना या प्रयोग के आधार पर क्रिया के कितने भेद होते हैं?
संरचना या प्रयोग के आधार पर मुख्यतः दो भेद होते हैं:
1. संयुक्त क्रिया (Composite Verb)
2. नामधातु क्रिया (Noun-derived Verb)
अकर्मक क्रिया के उदाहरण कौन-कौन से हैं?
1. वह बहुत तेज दौड़ता है।
2. बच्चा खेलता है।
3. गीता गाती है।
4. श्याम हँसता है।
5. लड़का सोता है।
6. सूरज निकला।
7. राम जाता है।
क्रिया के उदाहरण दीजिए:
खाता है, खेलता है, गाता है, पढ़ता है, दौड़ता है, सोता है, बनाता है, लिखता है, देखता है, हँसता है।
सकर्मक क्रिया किसे कहते हैं?
जिस क्रिया के साथ कर्म (object) का होना आवश्यक हो, उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं। जैसे- “राम खाना खाता है” में ‘खाता है’ सकर्मक क्रिया है, क्योंकि ‘खाना’ कर्म है।
20 क्रिया के शब्द बताइये |
खाना, पीना, सोना, खेलना, पढ़ना, लिखना, दौड़ना, गाना, बनाना, देखना, सुनना, हँसना, बोलना, बैठना, उठना, चलना, नाचना, गिरना, लाना, देना
क्रिया और क्रियापद में क्या अंतर है?
क्रिया केवल ‘कार्य’ या ‘व्यापार’ का नाम है (जैसे- पढ़ना, खाना), जबकि क्रियापद वह शब्द या शब्द-समूह है जो वाक्य में कर्ता के कार्य को दर्शाता है और वाक्य के अंत में आकर उसे पूर्ण करता है (जैसे- पढ़ता है, खाया)। सरल शब्दों में, वाक्य के अंत में आने वाली क्रिया ही क्रियापद कहलाती है।
सकर्मक और अकर्मक क्रिया में कैसे अंतर करें?
इसका सबसे सरल तरीका यह है कि क्रिया से “क्या?” या “किसको?” प्रश्न करें।
यदि प्रश्न का उत्तर मिल जाए (कर्म हो), तो वह सकर्मक है। (जैसे: राम क्या खाता है? सेव।)
यदि प्रश्न का उत्तर न मिले, तो वह अकर्मक है। (जैसे: राम सोता है।)
धातु (Root) किसे कहते हैं?
क्रिया के सबसे मूल और अविकल रूप को धातु कहते हैं। जब क्रिया से ‘ना’ या अन्य प्रत्यय हटा दिए जाते हैं, तो जो शेष बचता है वह धातु है। उदाहरण: पढ़ना ➔ पढ़ | जाना ➔ जा | करना ➔ कर।
संयुक्त क्रिया क्या होती है?
जब वाक्य में अर्थ को पूर्ण करने के लिए दो या दो से अधिक क्रियाओं का एक साथ प्रयोग किया जाता है, तो उसे संयुक्त क्रिया कहते हैं। इसमें आमतौर पर एक मुख्य क्रिया होती है और दूसरी सहायक क्रिया होती है जो काल या पूर्णता का बोध कराती है। उदाहरण: खा गया, दौड़ उठा, सो रहा।
क्या क्रिया के बिना वाक्य बन सकता है?
सामान्यतः, व्याकरण के नियम अनुसार क्रिया के बिना वाक्य पूर्ण नहीं माना जाता। हालांकि, मुक्तक वाक्य (जैसे- “बस! बस!”, “धन्यवाद!”) में क्रिया का लोप हो जाता है, लेकिन उनका अर्थ क्रिया की कल्पना से ही निकाला जाता है। पूर्ण और औपचारिक वाक्यों के लिए क्रिया अनिवार्य है।
परीक्षाओं में क्रिया से जुड़े कौन से प्रश्न पूछे जाते हैं?
CBSE और राज्य बोर्ड की परीक्षाओं में अक्सर निम्नलिखित प्रश्न पूछे जाते हैं:
वाक्य में क्रिया और क्रियापद की पहचान करना।
सकर्मक और अकर्मक क्रिया में अंतर बताना।
धातु और प्रत्यय पहचानना।
संयुक्त क्रिया के भेद बताना।
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