प्रिय छात्रों स्वागत है आपका आज के इस लेख में | आज के इस लेख में हम “अलंकार ” के बारे में जानेगें | अलंकार के अर्थ , भेद एवं उपभेद का गहराई से अध्ययन करेंगे | Alankar के बारे में जानने के लिए एक लेख को अंत तक पढ़िए |
अलंकार की परिभाषा / Alankar ki Paribhasha in Hindi
“अलंकार का अर्थ ‘आभूषण‘ होता है। जिस प्रकार आभूषण धारण करने से स्त्री की शोभा बढ़ जाती है, उसी प्रकार अलंकार से काव्य की सुंदरता और प्रभाव भी बढ़ जाता है।”
“अलंकार को परिभाषित करने के लिए एक प्रसिद्ध सूत्र है— ‘अलंकरोति इति अलंकारः’। अर्थात् जो अलंकृत करता है, वही अलंकार कहलाता है।”
सरल शब्दों में अलंकार का कार्य , काव्य की सौंदर्य में वृद्धि करना है।
अलंकार के भेद – Alankar ke Bhed Hindi mai
अलंकार के तीन भेद होते है | अलंकार को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है |
- शब्दालंकार (Shabd Alankar)
- अर्थालंकार (Arth Alankar)
- उभयालंकार (Shabd Alankar + Arth Alankar)
शब्दालंकार किसे कहते है? (Shabd Alankar)
“जब किसी काव्य या कविता में सौंदर्य शब्दों की सजावट से नहीं, बल्कि उनके अर्थ की गहराई और प्रभाव से प्रकट होता है, तब वहाँ अर्थालंकार होता है।”
शब्दालंकार के 6 भेद होते है जो की इस प्रकार है |
- 🔹 अनुप्रास अलंकार
- 🔹 यमक अलंकार
- 🔹 पुनरुक्ति अलंकार
- 🔹 विप्सा अलंकार
- 🔹 वक्रोक्ति अलंकार
- 🔹 श्लेष अलंकार
अनुप्रास अलंकार किसे कहते है ?
“किसी वाक्य अथवा काव्य-पंक्ति में जब एक ही वर्ण का पुनरावर्तन अनेक बार होकर ध्वनि-सौंदर्य तथा काव्य-रसमयता को बढ़ाता है, तब वहाँ अनुप्रास अलंकार की उपस्थिति मानी जाती है।”
उदाहरण: “नवनीत नयन निहार नवल नवनीला नभ।”
इस पंक्ति में “न” वर्ण बार-बार आया है। यही आवृत्ति भाषा को मधुर बनाती है, इसलिए यहाँ अनुप्रास अलंकार है।
अनुप्रास अलंकार के कितने भेद होते है ?
अनुप्रास अलंकार के 5 उपभेद होते है | जो की इस प्रकार है :
छेकानुप्रास, वृत्यानुप्रास, श्रुत्यानुप्रास, लाटानुप्रास, और अंत्यानुप्रास
1. छेकानुप्रास: जब किसी पंक्ति में एक ही वर्ण की आवृत्ति लगातार शब्दों की शुरुआत में होती है, तब उसे छेकानुप्रास कहते हैं।
उदाहरण :
“राम रथ रमता रहा।” → “र” वर्ण की आवृत्ति।
“पवन पथ पर प्रसन्न पग पड़े।” → “प” वर्ण की पुनरावृत्ति।
2. वृत्त्यानुप्रास: जब किसी पंक्ति के बीच-बीच में एक ही वर्ण की पुनरावृत्ति हो, तो उसे वृत्त्यानुप्रास कहते हैं।
उदाहरण :
“चाँदनी छाया में चरनी चरती गाय।” → “च” वर्ण बीच-बीच में आ रहा है।
“कभी करती क्रंदन, कभी करती कलरव।” → “क” वर्ण बार-बार बीच में।
3. श्रुत्यानुप्रास: जब शब्दों में प्रयुक्त ध्वनि सुनने में लगभग एक जैसी प्रतीत हो और संगीतात्मकता लाए, तो वह श्रुत्यानुप्रास कहलाता है।
उदाहरण :
“दीन-दुखी-दुखिया-दुखदायी।” → ध्वनि-निकटता।
“रूप-रस-रंग-रति।” → सुनने में मिलती-जुलती ध्वनि।
4. लाटानुप्रास : जब पंक्ति के प्रत्येक शब्द का पहला अक्षर एक ही हो, तो वह लाटानुप्रास कहलाता है।
उदाहरण :
“गंगा जल गगन गूंज।” → हर शब्द “ग” से शुरू।
“मधुर मधुबन में मन मोहा।” → सभी शब्द “म” से शुरू।
5. अंत्यानुप्रास: जब पंक्ति के अंत में एक ही ध्वनि या वर्ण बार-बार आए, तो उसे अंत्यानुप्रास कहते हैं।
उदाहरण :
“राम आया, काम आया, नाम आया।” → हर शब्द अंत में “आया”।
“जीवन है सपना, मन है अपना।” → पंक्तियों के अंत में समान ध्वनि।
यमक अलंकार किसे कहते है ?
“जब किसी कविता या वाक्य में एक ही शब्द बार-बार प्रयोग किया जाता है, लेकिन हर बार उसका अर्थ अलग-अलग निकलता है, तब वहाँ पर यमक अलंकार होता है।
🟢 यमक अलंकार के उदाहरण
- राम नाम में राम बसे, राम से जीवन धन्य।
- पहला राम = भगवान का नाम
- दूसरा राम = श्रीराम का स्वरूप
- गंगा जल से गंगा की महिमा गाई जाती है।
- पहला गंगा = नदी
- दूसरा गंगा = देवी गंगा
- कला से कला की दुनिया सजती है।
- पहला कला = हुनर
- दूसरा कला = चित्रकारी / नृत्य आदि
- दिन पर दिन दिनमान बढ़ता जाता है।
- पहला दिन = समय
- दूसरा दिन = सूरज (दिनमान)
- शिव की शक्ति से शिव का ही शिवत्व प्रकट होता है।
- पहला शिव = भगवान शिव
- दूसरा शिव = कल्याणकारी
- तीसरा शिवत्व = पवित्रता
👉 हर उदाहरण में एक ही शब्द का प्रयोग बार-बार किया गया है लेकिन हर बार उसका अर्थ अलग-अलग है — यही यमक अलंकार की खासियत है।
पुनरुक्ति अलंकार किसे कहते है ?
पुनरुक्ति अलंकार का अर्थ ठीक यमक अलंकार के विपरीत है | जब किसी काव्य या वाक्य से एक ही शब्द का प्रयोग बार-बार किया जाता है और हर बार इसका अर्थ एक ही होता है तो वहाँ पर पुनरुक्ति अलंकार का प्रयोग किया जाता है |
- चलो-चलो, समय निकल रहा है।
- यहाँ चलो शब्द दोहराकर शीघ्रता और आग्रह को दर्शाया गया है।
- धीरे-धीरे सब कठिनाइयाँ मिट जाती हैं।
- धीरे-धीरे से धैर्य और क्रमिकता व्यक्त होती है।
- बार-बार समझाने पर भी वह नहीं मानता।
- बार-बार शब्द के दोहराव से लगातार प्रयास का भाव आता है।
- दिन-प्रतिदिन वह और भी विद्वान बनता जा रहा है।
- दिन-प्रतिदिन से निरंतर प्रगति का भाव प्रकट हुआ।
- रात-रात भर वह पढ़ाई करता रहा।
- रात-रात शब्द से लगातार पूरी रात जागने का भाव व्यक्त हुआ।
👉 अंतर समझिए:
- यमक अलंकार → शब्द दोहरता है, लेकिन अर्थ बदलता है।
- पुनरुक्ति अलंकार → शब्द दोहरता है, और अर्थ वही रहता है।
विप्सा अलंकार किसे कहते है ?
“विप्सा अलंकार शब्दालंकार का एक प्रकार है। इसमें ऐसे शब्दों की बार-बार पुनरावृत्ति की जाती है, जिनसे किसी विशेष भाव जैसे– आदर, हर्ष, शोक या विस्मयादि का गहन रूप से अनुभव कराया जाता है।”
👉 उदाहरण के तौर पर:
- राम-राम-राम कहने से मन पवित्र हो जाता है। (आदर भाव)
- अरे-अरे-अरे! यह क्या हो गया! (विस्मय भाव)
- हाय-हाय-हाय! वह अब हमारे बीच नहीं रहा। (शोक भाव)
- वाह-वाह-वाह! कितना सुंदर गान है। (हर्ष भाव)
- जय-जय-जय शिवशंकर। (भक्ति/आदर भाव)
वक्रोक्ति अलंकार किसे कहते है ?
“जब कवि अपनी बात को सीधे न कहकर घुमा-फिराकर, व्यंग्य, संकेत या परोक्ष शैली में प्रस्तुत करता है, तब वहाँ वक्रोक्ति अलंकार होता है।”
- “तुम तो बड़े ईमानदार निकले, रिश्वत लिए बिना ही काम रोक दिया।”
- यहाँ ईमानदार शब्द व्यंग्य में प्रयोग हुआ है।
- “वाह! पढ़ाई भी खूब की है, रिजल्ट देखकर तो लग रहा है किताबों से दोस्ती ही नहीं थी।”
- खूब पढ़ाई कहना वास्तव में व्यंग्य है।
- “बहुत अच्छे! सूरज तो आज कल आधी रात को भी निकलने लगा है।”
- यहाँ असंभव बात कहकर वक्रोक्ति की गई है।
- “तुम्हारी सच्चाई तो अखबारों की खबरों जैसी है, जिस पर कोई विश्वास ही न करे।”
- सच्चाई शब्द उल्टे अर्थ में प्रयोग हुआ है।
- “बड़े सज्जन हो! गली के सारे झगड़े तुम्हारे कारण ही होते हैं।”
- सज्जन शब्द व्यंग्यपूर्वक कहा गया है।
श्लेष अलंकार किसे कहते है ?
“जब किसी काव्य या वाक्य में एक ही शब्द से एक साथ दो या दो से अधिक अर्थ निकलते हैं और सभी अर्थ उपयुक्त व सुंदर प्रतीत होते हैं, तब वहाँ श्लेष अलंकार होता है।”
👉 इसमें एक शब्द का प्रयोग करके कवि दोहरे या अनेक अर्थों का चमत्कार उत्पन्न करता है।
🟢 श्लेष अलंकार के उदाहरण
- नाग को देख नागराज मुस्कराए।
- पहला नाग = साँप
- दूसरा नागराज = अर्जुन (नागवंशी राजा)
- कमल पर कमल बैठकर कमल का ध्यान करने लगे।
- पहला कमल = पुष्प
- दूसरा कमल = भगवान विष्णु का आसन
- तीसरा कमल = भगवान विष्णु
- राम नाम की शक्ति से राम ने विजय पाई।
- पहला राम = नाम
- दूसरा राम = श्रीराम
- चंद्रमा का चंद्र जैसा चेहरा सबको मोहित कर गया।
- पहला चंद्रमा = आकाश का चंद्रमा
- दूसरा चंद्र = सुंदरी का चेहरा
- गंगा में गंगा स्नान करने से पाप मिट जाते हैं।
- पहला गंगा = नदी
- दूसरा गंगा = देवी गंगा
अर्थालंकार किसे कहते है? (Arth Alankar)
“जब शब्दों के प्रयोग से चमत्कार उत्पन्न होकर न होकर जब उन शब्दों के अर्थ से सौन्दर्य और आकर्षण उत्पन्न होता है तब वहाँ पर अर्थालंकार का प्रयोग होता है | “
दूसरे शब्दों में
जब कवि अपने भावों को ऐसे ढंग से प्रस्तुत करता है कि पाठक या श्रोता को गहराई में जाकर नया अर्थ, विशेष प्रभाव या अनोखा भाव अनुभव हो, तो वह अर्थालंकार कहलाता है।
अर्थालंकार के भेद
- उपमा अलंकार
- रूपक अलंकार
- उत्प्रेक्षा अलंकार
- द्रष्टान्त अलंकार
- संदेह अलंकार
- अतिश्योक्ति अलंकार
- उपमेयोपमा अलंकार
- प्रतीप अलंकार
- अनन्वय अलंकार
- भ्रांतिमान अलंकार
- दीपक अलंकार
- अपहृति अलंकार
- व्यतिरेक अलंकार
- विभावना अलंकार
- विशेषोक्ति अलंकार
- अर्थान्तरन्यास अलंकार
- उल्लेख अलंकार
- विरोधाभाष अलंकार
- असंगति अलंकार
- मानवीकरण अलंकार
- अन्योक्ति अलंकार
- काव्यलिंग अलंकार
- स्वभावोक्ति अलंकार
- कारणमाला अलंकार
- पर्याय अलंकार
- स्वभावोक्ति अलंकार
- समासोक्ति अलंकार
उपमा अलंकार किसे कहते है ?
उपमा का अर्थ होता है तुलना करना | जब भी किसी व्यक्ति या वस्तु की तुलना किसी दूसरे व्यक्ति से की जाती है वह पर उपमा अलंकार होता है |
उपमा अलंकार के उदाहरण इस प्रकार है |
- उसकी आवाज़ छूने को बादल-सी ममत्वपूर्ण लगती है।
- उसकी चाल पहाड़ की ठंडी हवा-सी सुकून देती है।
- खिलखिलाती हंसी बहती नदियों की संगीत-सी मधुर है।
- आँखों में चमक सितारों-सी अनमोल है।
- वह सोचता है जैसे गहरे महासागर की गहराई हो।
- बाल उसकी रात के बिना चाँद के अंधकार-सदृश हैं।
- बोलने में वह शहनाई की मधुरता-सा प्रभावशाली है।
- उसका धैर्य पहाड़ की मजबूती-सा अटूट है।
- चेहरा चाँद की पहली किरणों-सा कोमल और निखरा हुआ है।
- उसका स्वागत हवा की मीठी फुहार-सा ताज़गी भरा होता है।
ये सभी उपमा अलंकार की विशिष्टता और सुंदरता को दर्शाते हैं, जो कविता या वाक्यार्थ को गहराई और जीवंतता देते हैं। इन उदाहरणों में उपमेय, उपमान, समानता दर्शाने वाले शब्दों और समान गुणों का सही उपयोग किया गया है।
उपमा अलंकार के चार अंग होते है जो की इस प्रकार है :
उपमेय, उपमान, वाचक शब्द और साधारण धर्म।
- उपमेय: “उपमेय का अर्थ है – वह वस्तु या व्यक्ति जो उपमा प्राप्त करता है। यानी जब किसी व्यक्ति या वस्तु की तुलना किसी अन्य से की जाती है, तो जिस पर तुलना की जाती है, उसे उपमेय कहते हैं।”
उपमेय की परिभाषा:
उपमेय वह होता है जिसका किसी अन्य वस्तु या व्यक्ति से तुलना की जाती है। इसे “तुलना हेतु वस्तु” कहा जा सकता है। यह तुलना का लक्ष्य होता है, जिस पर उपमा अलंकार लागू होता है।
उदाहरण:
- वाक्य: “हरिपद कोमल कमल से।”
यहाँ ‘हरिपद’ उपमेय है क्योंकि उसकी तुलना ‘कमल’ से की गई है।
उपमान (Comparison Word)
परिभाषा:
उपमान वह शब्द होता है, जिससे किसी वस्तु या गुण की तुलना की जाती है। उपमान के द्वारा तुलना करने पर मुख्य रूप से दो वस्तुओं या गुणों के बीच समानता दिखाई जाती है।
उदाहरण:
“रेखा की आंखें चाँद सी चमकीली हैं।”
यहाँ “चाँद” उपमान है क्योंकि रेखा की आंखों की तुलना चाँद से की गई है।
वाचक शब्द (Indicative Word / Comparison Indicator)
परिभाषा:
वाचक शब्द वे शब्द होते हैं जो तुलना (उपमा) को दर्शाते हैं। वे यह बताते हैं कि उपमा लगाई जा रही है और किस प्रकार की तुलना हो रही है।
सामान्य वाचक शब्द:
- जैसे, सी, सा, समान, तुल्य, बत्तीस, झिलमिल, जैसे कि, जैसे…वैसे इत्यादि।
उदाहरण:
“सूरज सा तेज चमकता है।”
यहाँ “सा” वाचक शब्द है जो उपमा को दर्शाता है।
साधारण धर्म (Common Quality)
परिभाषा: साधारण धर्म उस समान गुण या विशेषता को कहते हैं जो उपमेय (जिससे तुलना की जाती है) और उपमान (जिससे तुलना की जाती है) दोनों में पाया जाता है। यह वह गुण होता है जिस आधार पर तुलना की जाती है।
उदाहरण:
“रमेश की दीवार पत्थर सी मजबूत है।”
यहाँ ‘मजबूती’ साधारण धर्म है क्योंकि दोनों – रमेश की दीवार और पत्थर – मजबूत हैं।
उपमा अलंकार के दो भेद
- पूर्णोपमा अलंकार
- लुप्तोपमा अलंकार
पूर्णोपमा अलंकार:
पूर्णोपमा अलंकार के अंतर्गत उपमा के सभी अंग (उपमेय , उपमान , वाचक शब्द , साधारण धर्म आदि) सम्मिलित होते है | जहाँ पर यह सभी अंग एक साथ होते है वहाँ पर पूर्णोपमा अलंकार होता है |
- राम की भांति वह भी न्यायप्रिय है।
- उसका मुख चाँद के समान उज्ज्वल है।
- यहाँ का मौसम फूलों जैसा मंद और सुगंधित है।
- बाल उस बच्चे के जैसे कोमल हैं जैसे कमल के पंखुड़ी।
- उसकी मुस्कान सूरज की पहली किरणों जैसी गर्माहट लिए हुई है।
पूर्णोपमा अलंकार में उपमेय, उपमान, समान धर्म, और वाचक शब्द (जैसे, सा, समान) सभी होते हैं।
लुप्तोपमा अलंकार:
“लुप्तोपमा अलंकार वह है जिसमें उपमा के सभी अंग उपस्थित नहीं होते। इसमें कभी-कभी केवल एक, दो या तीन अंग ही प्रयुक्त होते हैं।”
लुप्तोपमा अलंकार के उदाहरण
- उसकी चाल पक्षी की तरह तेज़ है। (यहाँ वाचक शब्द लुप्त है)
- तीव्र सोच की इसके दिमाग है। (यहाँ उपमान लुप्त है)
- चेहरे पर फूल खिल उठे। (यहाँ उपमान और वाचक शब्द दोनों लुप्त हैं)
- बाल रात की तरह काले हैं। (यहाँ वाचक शब्द लुप्त है)
- वह पत्थर की तरह मजबूत है। (यहाँ वाचक शब्द उपयोग नहीं हुआ)
लुप्तोपमा अलंकार उस स्थिति को कहते हैं जहाँ उपमेय, उपमान, समान धर्म या वाचक शब्दों में से कोई एक या अधिक अंग अनुपस्थित रहते हैं।
रूपक अलंकार किसे कहते है ?
रूपक अलंकार वह काव्य अलंकार है जिसमें किसी वस्तु, व्यक्ति या गुण को उसका वास्तविक रूप न देकर, उसे किसी दूसरे रूप में पूरी तरह से धारण करा दिया जाता है। इस अलंकार में उपमेय (जिसकी तुलना हो रही है) और उपमान (जिससे तुलना की जा रही है) के बीच कोई भेद नहीं दिखाया जाता, बल्कि उपमेय को ही उपमान का रूप दे दिया जाता है। यानि, यहाँ “जैसे” या “सा” जैसे शब्दों का प्रयोग नहीं होता, बल्कि वस्तु को सीधे रूप में प्रस्तुत किया जाता है। रूपक अलंकार का उद्देश्य किसी वस्तु के गुणों को और भी प्रभावशाली, सुंदर और विस्तृत तरीके से दर्शाना होता है।
सरल शब्दों में कहें तो, रूपक अलंकार में एक वस्तु को पूरी तरह से दूसरी चीज का रूप दे दिया जाता है ताकि उसकी विशेषताओं को अधिक सजीव और गहनता से समझाया जा सके।
- मुख कमल है।
- चरण सरोज हैं।
- मनसागर गहरा है।
- जीवन एक सुन्दर सा जराग है।
- हृदय दीपकमय है।
इन उदाहरणों में वस्तु (उपमेय) को पूर्ण रूप से दूसरे रूप (उपमान) में प्रस्तुत किया गया है, बिना तुलना के शब्दों के। ये रूपक अलंकार के सार को दर्शाते हैं, जहाँ वस्तु को सीधे दूसरे रूप में प्रस्तुत कर उसकी विशेषताओं को प्रभावी ढंग से उजागर किया जाता है।
रूपक अलंकार 3 के भेद
- सम रूपक अलंकार
- अधिक रूपक अलंकार
- न्यून रूपक अलंकार
- सम रूपक अलंकार
सम रूपक अलंकार वह होता है जिसमें उपमेय (जिसकी तुलना हो रही है) और उपमान (जिससे तुलना की जा रही है) के बीच पूरी समानता होती है। यहाँ दोनों के गुण समान रूप से प्रकट होते हैं और उनके बीच कोई अंतर नहीं दिखता। इसे हम कह सकते हैं कि उपमेय और उपमान दोनों के बीच सौंपा गया भाव पूरी तरह मेल खाता है।
सम रूपक अलंकार के उदाहरण
- बीती विभावरी जागरी।
- अम्बर-पनघट में डुबा रही।
- तारघट उषा नागरी।
- सूर्य किरणों की माला।
- मन निर्मल जल है।
अधिक रूपक अलंकार
अधिक रूपक अलंकार उस स्थिति को कहते हैं जब उपमेय (जिसकी तुलना हो रही है) में उपमान की तुलना में कुछ अधिकता, श्रेष्ठता या बढ़ोतरी का भाव व्यक्त किया जाता है। इससे उपमेय को श्रेष्ठतम या ज्यादा प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया जाता है ताकि उसकी महत्ता बढ़े।
अधिक रूपक अलंकार के उदाहरण
- उसका रूप चाँद से भी अधिक उज्ज्वल है।
- वह सागर से भी गहरा है।
- उसकी वाणी मधु से मीठी है।
- उसके हृदय की गहराई अनंत है।
- उसकी चाल गर्जन करती बिजली की तरह तेज है।
न्यून रूपक अलंकार
न्यून रूपक अलंकार में उपमेय को उपमान की अपेक्षा कमतर, छोटा या कम प्रभावशाली दिखाया जाता है। यहाँ उपमान की तुलना में उपमेय का स्तर घटाकर दर्शाया जाता है जिससे उसकी साधारणता या अवमूल्यन दिखाई देती है।
न्यून रूपक अलंकार के उदाहरण
- उसकी हँसी फूल से भी कम कोमल है।
- वह पत्थर से भी अधिक कठोर नहीं है।
- उसकी आँखें झील से कम शांत हैं।
- उसका व्यक्तित्व हवा से भी कम मुक्त नहीं है।
- उसकी आवाज़ नदी की तुलना में कम प्रबल है।
उत्प्रेक्षा अलंकार
परिभाषा: असंभव या असाधारण घटना को असामान्य रूप में मान लेना।
उदाहरण:
- बादल धरती को छू रहे हैं।
- फूल मुझसे बात करने लगा।
- नदी ऊपर की ओर बह रही है।
द्रष्टान्त अलंकार
परिभाषा: किसी बात को स्पष्ट करने हेतु परिचित वस्तु या घटना का उदाहरण देना।
उदाहरण:
- जैसे सूरज रोशनी फैलाता है, वैसे ही उनका प्रेम फैलता है।
- जैसे पक्षी उड़ते हैं, मन भी स्वच्छंद होना चाहिए।
- जैसे पहाड़ ऊँचा होता है, उसकी हिम्मत भी वैसी है।
संदेह अलंकार
परिभाषा: किसी बात की अनिश्चितता या शंका प्रकट करना।
उदाहरण:
- क्या सचमुच वह वापस आएगा?
- कहीं यह भ्रम तो नहीं?
- क्या ये कोई सपना है?
अतिश्योक्ति अलंकार
परिभाषा: किसी बात को अत्यधिक बढ़ाकर कहना।
उदाहरण:
- उसकी आवाज़ हिमालय जैसी गूंजती है।
- उसका ग़ुस्सा आग की तरह भारी है।
- उसकी सुंदरता चाँद से भी अधिक है।
उपमेयोपमा अलंकार
परिभाषा: जहाँ उपमेय और उपमान दोनों स्पष्ट रूप से दर्शाए जाएँ।
उदाहरण:
- उसकी आँखें जैसे कमल के फूल।
- बाल रेशमी जैसे बादल।
- चाल बिजली की तरह तेज़।
प्रतीप अलंकार
परिभाषा: एक वस्तु के माध्यम से दूसरी वस्तु को दर्शाना।
उदाहरण:
- जैसे आग में लोहे की चमक होती है।
- जैसे पानी में चाँद की छवि होती है।
- जैसे फूल पर मधु टपकता है।
अनन्वय अलंकार
परिभाषा: ऐसे वाक्य जहाँ शब्द और अर्थ का टकराव या विरोध होता है।
उदाहरण:
- वह आसमान में उड़ता हुआ जमीन पर खड़ा था।
- जल सूख गया और नदी बह रही थी।
- सूरज छुप गया और रोशनी बढ़ गई।
भ्रांतिमान अलंकार
परिभाषा: भ्रम उत्पन्न करने वाला अलंकार।
उदाहरण:
- वह चाँदमी रात में सूरज था।
- पेड़ उड़ता हुआ पक्षी लग रहा था।
- पानी ठोस होकर बह रहा था।
दीपक अलंकार
परिभाषा: कही गई बात को रोशन करना या उसके अर्थ को स्पष्ट करना।
उदाहरण:
- ज्ञान की रोशनी अंधकार दूर करती है।
- प्रेम की लौ दिलों को गर्माती है।
- सत्य की किरण सब कुछ प्रकाशित करती है।
अपहृति अलंकार
परिभाषा: कुछ शब्दों या भावों को छिपाना या खत्म करना।
उदाहरण:
- उसने अपनी बात अधूरी छोड़ दी।
- दुःख को छुपा लिया।
- मन के विचार छुपा लिए।
व्यतिरेक अलंकार
परिभाषा: विरोधाभास या विपरीत भाव व्यक्त करना।
उदाहरण:
- जल नहीं था, फिर भी नदी बह रही थी।
- वह जीवित था, मगर मरा सा दिख रहा था।
- भूख लगी थी, फिर भी कुछ न खाया।
विभावना अलंकार
परिभाषा: परिस्थिति या भाव को प्रकट करना।
उदाहरण:
- बादल घिरे हुए थे।
- हवा ठंडी थी।
- पेड़ झुके हुए थे।
विशेषोक्ति अलंकार
परिभाषा: किसी विषय का विशेष गुण या पहलू दिखाना।
उदाहरण:
- मीठी बात, कड़वी सच्चाई।
- तेज़ धूप, मद्धिम छाँव।
- सुगंधित फूल, रंगीन पंखुड़ी।
अर्थान्तरन्यास अलंकार
परिभाषा: व्याकरणिक नियम का अर्थ के अनुसार भिन्न प्रयोग।
उदाहरण:
- छाया थी, पर सूरज चमक रहा था।
- फूल खिला, पर खुशबू नहीं आई।
- नदी बह रही थी, पर पानी नहीं था।
उल्लेख अलंकार
परिभाषा: किसी प्रसिद्ध व्यक्ति, वस्तु या घटना का संकेत देना।
उदाहरण:
- राम जैसे वीर।
- सीता जैसी सन्मानित।
- अर्जुन की तरह शूरवीर।
विरोधाभाष अलंकार
परिभाषा: दो विरोधी भावों का एक साथ होना।
उदाहरण:
- जिंदा मरा सा।
- हँसते हुए रोना।
- चुप्पी में तेज़ आवाज़।
असंगति अलंकार
परिभाषा: दो या अधिक शब्दों, भावों का मेल न होना।
उदाहरण:
- बर्फीली गर्मी।
- आग की ठंडक।
- फूल की कठोरता।
मानवीकरण अलंकार
परिभाषा: निर्जीव वस्तुओं को मानव के गुण देना।
उदाहरण:
- पेड़ ने हस्ते हुए पत्ते हिलाए।
- नदी ने गीत गाया।
- चाँद ने मुस्कुराकर झील को देखा।
अन्योक्ति अलंकार
परिभाषा: एक विचार से दूसरे विचार की ओर गति।
उदाहरण:
- दिन बीता, शाम आई।
- अंधेरा छा गया, दीप जल उठा।
- बारिश हुई, धरती हरी हो गई।
काव्यलिंग अलंकार
परिभाषा: काव्य में निहित भाव या लय का उल्लेख।
उदाहरण:
- वह प्रेम की मूरत थी।
- उसकी आवाज़ संगीत की धुन।
- शब्द उसकी आत्मा का गीत।
स्वभावोक्ति अलंकार
परिभाषा: वस्तु या व्यक्ति का स्वभाव या विशेषता प्रकट करना।
उदाहरण:
- हवा शांत थी।
- पानी तेज़ बह रहा था।
- फूल मनमोहक खुशबू छोड़ रहा था।
कारणमाला अलंकार
परिभाषा: कारणों की श्रृंखला दर्शाना।
उदाहरण:
- बारिश हुई, इसलिए खेत हरे हो गए।
- पढ़ाई की, इसलिए सफलता मिली।
- मेहनत की, इसलिए फल मिला।
पर्याय अलंकार
परिभाषा: समान अर्थ वाले शब्दों का प्रयोग।
उदाहरण:
- दीपक और मशाल।
- नदी और नाला।
- राजा और सम्राट।
समासोक्ति अलंकार
परिभाषा: समास का प्रयोग कर विशेष भाव देना।
उदाहरण:
- राजपाट संभाला।
- वन्यजीवन देखा।
- मित्रता निभाई।
उभयालंकार किसे कहते है?
उभयालंकार की परिभाषा यह है कि जब शब्दालंकार और अर्थालंकार दोनों का प्रयोग एक ही वाक्य में होता है और इनके मेल से अलंकार में विशेष चमत्कार या आकर्षण उत्पन्न होता है, तो इसे उभयालंकार कहते हैं।
आसान भाषा में कहें तो उभयालंकार वह अलंकार है जिसमें शब्द की लयात्मक शोभा (शब्दालंकार) और अर्थ की गहराई (अर्थालंकार) दोनों मिलकर कविता को सुंदर बनाते हैं। इस प्रकार का अलंकार शब्द और अर्थ दोनों स्तरों पर काव्य की सजावट करता है।
उभयालंकार के प्रमुख प्रकार:
- संसृष्टि उभयालंकार: इसमें शब्दालंकार और अर्थालंकार दोनों साफ़ तौर पर दिखाई देते हैं और उन्हें अलग करना आसान होता है। जैसे – “तिल तण्डुल” (जहाँ दोनों शब्द अलग-अलग पहचान में आते हैं)।
- संकर उभयालंकार: इसमें कई अलंकार इतने घुलमिल जाते हैं कि उन्हें अलग करना मुश्किल हो जाता है। जैसे – “नीरक्षीर” (जल और दूध के मिश्रण के रूप में)।
उदाहरण:
उभयालंकार के उदाहरण:
1.
“कजरारी अखियन में कजरारी न लखाय।”
यहाँ शब्दों की पुनरावृत्ति भी है और अर्थ की सुंदरता भी है, इसलिए यह उभयालंकार है।
2.
“चंचल चितवन चुरा ले गई चैन।”
यहाँ ‘च’ ध्वनि की आवृत्ति शब्द सौंदर्य पैदा करती है, और चितवन द्वारा मन मोह लेने का भाव अर्थ सौंदर्य देता है। इसलिए यह उभयालंकार है।
3.
“मधुर मुस्कान मन में मधुबन खिला गई।”
यहाँ ‘म’ ध्वनि की पुनरावृत्ति है और मुस्कान को मधुबन खिलने से तुलना कर अर्थ सौंदर्य भी है। इसलिए यह उभयालंकार है।
4.
“नील नभ में नाचते नन्हे नक्षत्र।”
यहाँ ‘न’ ध्वनि की आवृत्ति शब्द सौंदर्य देती है और आकाश में तारों का सुंदर चित्र अर्थ सौंदर्य देता है। इसलिए यह उभयालंकार है।
5.
“फूलों की फुहार से फागुन मुस्काया।”
यहाँ ‘फ’ ध्वनि की पुनरावृत्ति है और फागुन के मुस्काने का सुंदर भाव अर्थ सौंदर्य देता है। इसलिए यह उभयालंकार है।





