हिंदी साहित्य का हृदय – रस। जानिए नवरस, उनकी परिभाषा, प्रकार, विशेषताएँ और उदाहरण सरल भाषा में। प्रतियोगी परीक्षाओं और विद्यार्थियों के लिए उपयोगी अध्ययन सामग्री।
नमस्कार प्रिय मित्रों | आपका स्वागत है हिंदी व्याकरण के एक और लेख में | आज के इस लेख में हम रस के बारे में अध्ययन करेंगे | हिंदी में रस की परिभाषा , रस सिद्धांत आदि का विवेचन और रस के 11 भेदों के बारे में विस्तारपूर्वक अध्ययन करेंगे |
रस किसे कहते है ? रस की परिभाषा |
रस शब्द का अर्थ होता है “आनंद” | जब आप कोई कविता पढ़ते या सुनते हैं, तो आपके मन में कैसा भाव जगता है?
- कभी हँसी आती है (हास्य रस),
- कभी वीरता का जोश (वीर रस),
- कभी दुख की अनुभूति (करुण रस)…
यही भाव जब कला के माध्यम से (कविता, नाटक, गीत आदि) हमारे मन में आनंद के रूप में प्रकट होते हैं, तो उसे रस कहा जाता है।
अर्थात “किसी भी काव्य की पढ़कर , सुनकर जो आपके मन में जो आलौकिक आनंद की अनुभूति है उस आनंद को रस के द्वारा प्रकट किया जाता है | और यही आनंद रस कहलाता है | “
रस के चार अंग (अवयव) होते है जो की इस प्रकार है |
- स्थायीभाव
- विभाव
- अनुभाव
- व्यभिचारी अथवा संचारी भाव
स्थायीभाव किसे कहते है ?
स्थायी भाव का शाब्दिक अर्थ होता है ‘प्रधान भाव‘| जो भाव हमें रस की अवस्था तक पहुँचता है उस भाव को प्रधान भाव कहते है | काव्य एवं नाटक आदि में यह स्थायी भाव शुरू से लेकर अंत तक होता है | स्थायी भाव को रस का आधार माना गया है | स्थायी भावों की कुल संख्या 9 है |
स्थायी भावों की कुल संख्या 9 होने के कारण इन्ह्ने “नवरस ” की उपाधि दी गयी है | शुरुआत में इसकी संख्या 9 थी परन्तु बाद में आचार्यों एवं विद्वानों ने दो और भावों को स्थायी भाव के अंदर मिला दिया | इन दो रसों के नाम है वात्सल्य व भगवद् विषयक रति| इन दो भावो के मिलने के बाद स्थायी भाव की संख्या 11 हो गयी है |
वात्सल्य (ममता और स्नेह से जुड़ा भाव)
भगवद्विषयक रति (भगवान के प्रति प्रेम का भाव)
रस एवं उनके स्थायी भाव
| रस | स्थायी भाव |
| श्रंगार | रति |
| हास्य | हास्य |
| करुण | शौक |
| रौद्र | क्रोध |
| अद्भुत | विस्मय |
| वात्सल्य | स्नेह |
| वीभत्स | घृणा |
| शांत | निर्वेद |
| वीर | उत्साह |
| भक्ति रस | अनुराग |
विभाव किसे कहते है ?
“काव्य में जिस व्यक्ति, वस्तु या परिस्थिति के कारण किसी भाव की उत्पत्ति होती है, उसे विभाव कहते हैं।”
👉 विभाव दो प्रकार के होते हैं –
- आलम्बन विभाव – जिसके प्रति भाव प्रकट किया जाता है।
- उद्दीपन विभाव – वह साधन या परिस्थिति, जिससे भाव और अधिक प्रकट होता है।
अनुभाव किसे कहते है ?
अनुभाव वे प्राकृतिक क्रियाएँ या हावभाव हैं, जिनसे किसी व्यक्ति के मन में छिपे स्थायी भाव बाहर प्रकट होते हैं। जैसे किसी के दुःख से आँखों में आँसू आना या प्रसन्नता में मुस्कुरा देना अनुभाव कहलाता है।
सरल शब्दों में
“जब किसी के मन में कोई भाव होता है, तो वह चेहरे के हाव-भाव, बोलचाल, अंगों की क्रियाओं या आँखों के इशारों से प्रकट होता है; इन्हीं बाहरी संकेतों या हरकतों को अनुभाव कहते हैं”।
जैसे— खुशी में मुस्कुराना, दुःख में आँसू बहाना या डर के समय काँपना— ये सब अनुभाव के उदाहरण हैं।
व्यभिचारी अथवा संचारी भाव किसे कहते है ?
संचारी भाव या व्यभिचारी भाव वे अस्थायी मनोभाव हैं, जो स्थायी भाव के साथ मिलकर किसी भावदशा को गहराई और विविधता देते हैं। जैसे चिंता, घबराहट, स्मरण, आलस्य, द्वेष आदि मन में कुछ समय के लिए आते हैं और फिर चले जाते हैं, इन्हें ही संचारी या व्यभिचारी भाव कहते हैं।
रसों के 11 प्रकार कौन-कौन से है ?
हिंदी के रसों के 11 प्रकार होते है जो की निन्मलिखित है :
- श्रृंगार-रस
- हास्य रस
- करुण रस
- वीर रस
- भयानक रस
- रौद्र रस
- वीभत्स रस
- अद्भुत रस
- शांत रस
- वात्सल्य रस
- भक्ति रस
अब हम एक-एक करके इन रसों के बारे में उदहारण के साथ गहराई से अध्ययन करते है |
- श्रृंगार-रस : “प्रेम, सौंदर्य और आकर्षण से जुड़ी भावनाएँ जब हमे किसी कविता या साहित्य में व्यक्त होती है तो वह पर श्रृंगार रस का प्रयोग होता है |”
उदाहरण:
- राधा की आँखों में कृष्ण के लिए प्यारा अनुराग चमक रहा है।
- वसंत ऋतु में बगिया फूलों से मुस्कुरा उठी।
- चाँदनी रात में नायक-नायिका का मिलन बड़ा मनमोहक लगता है।
- प्रिय की मुस्कान देखकर मन अत्यंत आनंदित हो जाता है।
- नवविवाहित दंपत्ति के मुख पर प्रेम की रेखाएँ साफ झलकती हैं।
हास्य रस (Hasya Ras)
परिभाषा:
जब रचनाओं में कोई बात, हाव-भाव, या दृश्य हँसी व मनोरंजन कराने वाला हो, उसे हास्य रस कहते हैं।
उदाहरण:
- बच्चे ने जूते उल्टे पहन लिए तो सब हँस पड़े।
- बुजुर्ग की गलत हिंदी सुनकर सब लोग मुस्कुराने लगे।
- गधा शेर की नकल करने लगा तो जंगल में ठहाके गूंजे।
- दोस्त की मजेदार बात सुन सभी दोस्त हँसते-हँसते गिर पड़े।
- बन्दर ने टोपी पहनकर बाज़ार में तमाशा किया तो भीड़ हँस उठी।
करुण रस (Karun Ras)
परिभाषा:
जब कविता या कहानी में दु:ख, दुखद घटना या करुणा सम्बन्धी भावनाएँ व्यक्त हों, उसे करुण रस कहते हैं।
उदाहरण:
- भूख से तड़पते बच्चे की आँखें देख हृदय पिघल जाता है।
- वृद्ध माता-पिता अकेले पड़ गए, यह दृश्य बहुत पीड़ा देता है।
- घायल पक्षी फड़फड़ाते हुए ज़मीन पर गिर पड़ा।
- किसान की हालत देखकर गाँव वालों की आँखें नम हो गईं।
- बारिश में खुले आसमान के नीचे बैठा वृद्ध दंपत्ति मिला।
वीर रस (Veer Ras)
परिभाषा:
जहाँ वीरता, पराक्रम, साहस या जुझारूपन के भाव को दर्शाया जाए, उसे वीर रस कहते हैं।
उदाहरण:
- सैनिक सीमा पर डटकर दुश्मनों का सामना करते हैं।
- झाँसी की रानी ने मैदान में तलवार उठाई।
- बच्चे ने गहरे पानी में डूबती बहन को बचा लिया।
- गाँव के युवाओं ने पहाड़ काटकर रास्ता बना दिया।
- आपदा में फंसे लोगों को पुलिस ने बहादुरी से बचाया।
भयानक रस (Bhayanak Ras)
परिभाषा:
जहाँ डर, भय, संकट या खतरों का चित्रण हो, वहां भयानक रस होता है।
उदाहरण:
- सुनसान रात में जंगल से अजीब आवाज़ें आने लगीं।
- भूकंप में जमीन हिलती देख लोग डर से भागने लगे।
- उस पुराने महल में किसी के रोने की चीख सुनाई दी।
- सुनसान सड़क पर अचानक कुत्तों का झुंड दिखाई दिया।
- बिजली कड़कने पर बच्चा माँ से लिपट गया।
रौद्र रस (Raudra Ras)
परिभाषा:
जब क्रोध, गुस्सा या उग्रता का प्रदर्शन हो, उसे रौद्र रस कहते हैं।
उदाहरण:
- अन्याय देखकर नेता ने सभा में तीखा भाषण दिया।
- शिक्षक ने अनुशासनहीनता पर छात्रों को डांट लगाई।
- राजा ने धोखेबाज़ सिपाही को दंड दिया।
- माता अपने बच्चे पर झूठ बोलने से नाराज हो गई।
- किसान ने फसल खराब करनेवाले को पकड़ लिया।
वीभत्स रस (Vibhatsya Ras)
परिभाषा:
जहाँ घृणा, गंदगी या विचित्रता के भाव वर्णित हों, वहां वीभत्स रस होता है।
उदाहरण:
- गंदे कूड़े की दुर्गंध से गाँववाले नाक बंद करने लगे।
- किसी जानवर का सड़ा मांस सड़क पर पड़ा था।
- जुए में हारकर व्यक्ति अपने व्यवहार से घिनौना लगने लगा।
- सड़े हुए फल देखकर सभी बच्चे दूर भाग गए।
- युद्ध के मैदान में बिखरे शव देखकर मन व्याकुल हो गया।
अद्भुत रस (Adbhut Ras)
परिभाषा:
जब किसी घटना, वस्तु या दृश्य में विस्मय, आश्चर्य या अनोखापन झलके, उसे अद्भुत रस कहते हैं।
उदाहरण:
- वैज्ञानिकों ने नया ग्रह खोज लिया।
- जादूगर ने हवा में उड़ती गेंद दिखा दी।
- पहली बार हिमपात देखकर बच्चे चकित रह गए।
- एक नया आविष्कार देखकर सबने ताली बजाई।
- शादी में दूल्हे का घोड़े से गिरना सबको अजीब लगा।
शांत रस (Shant Ras)
परिभाषा:
जहाँ मन में संन्यास, वैराग्य या गहरी शांति की भावना हो, वहाँ शांत रस होता है।
उदाहरण:
- साधु तपस्या में लीन होकर संसार से निर्लिप्त हो गया।
- नदी के किनारे बैठकर योगी ध्यान कर रहा है।
- शांति की अनुभूति देने वाला संध्याकाल है।
- सबकुछ खोकर व्यक्ति ने मन को समर्पित कर दिया।
- वृद्धा मंदिर में बैठकर प्रभु का भजन गा रही है।
वात्सल्य रस (Vatsalya Ras)
परिभाषा:
जब माता-पिता, बड़ों या संरक्षकों का बच्चों या छोटों के प्रति प्रेम दिखे, उसे वात्सल्य रस कहते हैं।
उदाहरण:
- माँ ने बच्चे को गले लगाकर दुलार किया।
- पिता ने घुटनों पर बैठाकर बेटे को कहानी सुनाई।
- दादी ने पोते को खिलौना दिया।
- शिक्षक ने छात्र की गलती पर स्नेह से समझाया।
- छोटा भाई गिरते ही बड़े भाई की गोद में चला गया।
भक्ति रस (Bhakti Ras)
परिभाषा:
जहाँ ईश्वर, गुरु या किसी आदर्श के प्रति श्रद्धा, समर्पण और श्रद्धा-भाव दिखे, वहाँ भक्ति रस होता है।
उदाहरण:
- मीरा बाई कृष्ण के प्रति गा रही है।
- तुलसीदास राम के भजन में तल्लीन हैं।
- भक्त मंदिर में घंटियां बजाते हैं।
- माता रानी के भक्त दीप जलाकर प्रार्थना करते हैं।
- सुबह-सुबह गाँव के लोग एक साथ आरती करते हैं।
रस से सम्बंधित लघु प्रश्न उत्तर
रस किसे कहते हैं?
काव्य या साहित्य पढ़ने-सुनने से हृदय में जो खास भावों के साथ अलौकिक आनंद उत्पन्न हो, उसे ‘रस’ कहते हैं। सरल शब्दों में, रस कविता का वह स्वाद है जो मन को छू जाए।
रस के कितने अवयव होते हैं?
रस के चार मुख्य अवयव होते हैं—स्थायीभाव, विभाव, अनुभाव और व्यभिचारी भाव। ये चारों मिलकर ही रस का संपूर्ण अनुभव कराते हैं।
रस के कितने प्रकार होते हैं और वह कौन-कौन से हैं?
रस मुख्य रूप से ग्यारह प्रकार के होते हैं—श्रृंगार, हास्य, वीर, करुण, रौद्र, भयानक, वीभत्स, अद्भुत, शांत, वात्सल्य और भक्ति। इन सभी रसों के अलग-अलग भाव और अनुभव होते हैं, जो साहित्य को रंग-बिरंगा बनाते हैं।






