कारक KE BHED AVEM UDAHARAN HINDI MAI
कारक किसे कहते है ? कारक की परिभाषा |
“कारक शब्द का अर्थ होता है — क्रिया (कार्य) को करने या उससे संबंधित भूमिका निभाने वाला पद। प्रत्येक क्रिया के साथ कोई-न-कोई संज्ञा या सर्वनाम जुड़ा होता है, जो अपनी एक विशेष भूमिका निभाता है। उसी को कारक कहा जाता है।” “कारक वह होता है, जो संज्ञा एवं सर्वनाम का वाक्य में विभक्ति चिह्नों के द्वारा क्रिया से संबंध स्थापित करता है।”
कारक के विभक्ति चिह्न या परसर्ग
कारक विभक्ति की परिभाषा : कारक विभक्ति, संज्ञा एवं सर्वनाम की वाक्य में भूमिका को दर्शाती है। इस भूमिका को प्रकट करने के लिए जिन चिह्नों का प्रयोग किया जाता है, उन्हें ही ‘कारक विभक्ति’ कहा जाता है।
कारक विभक्ति जैसे: से,ने, को, के लिए’, आदि|
कारक के उदाहरण
- बिल्ली ने चूहे को मारा |
- राम ने अंकित को पत्र लिखा |
- अंकिता ने रीनी को किताबे दी |
- राहुल ने गाडी चलाई |
- पुलिस ने चोर पकड़ा |
कारक के कितने भेद होता है ?
कारक के कुल 8 भेद होते है जो की इस प्रकार है :
- कर्त्ता कारक
- कर्म कारक
- करण कारक
- सम्प्रदान कारक
- अपादान कारक
- संबंध कारक
- अधिकरण कारक
- सम्बोधन कारक
📘 कारक, कारक चिह्न और उनका अर्थ — सारणी
| कारक का नाम | कारक चिह्न (विभक्ति) | कारक का अर्थ (भूमिका) |
| कर्ता कारक | ने | जो कार्य करता है (क्रिया करने वाला) |
| कर्म कारक | को | जिस पर कार्य किया जाता है |
| करण कारक | से | जिसके द्वारा कार्य किया जाता है (साधन) |
| सम्प्रदान कारक | को | जिसके लिए कार्य किया गया (लाभार्थी) |
| अपादान कारक | से | जहाँ से अलग होने की क्रिया होती है |
| अधिकरण कारक | में, पर | जहाँ पर कार्य होता है (स्थान) |
| संबंध कारक | का, के, की | किसी के साथ संबंध दर्शाना |
| संबोधन (हे) कारक | हे, अरे, ओ | किसी को पुकारने या बुलाने के लिए |
“ने को से को से में का हे” – कारक चिह्न याद रखने के लिए उपयोगी।
1. कर्ता कारक किसे कहते है ?
“वाक्य में उस पद को ‘कर्ता कारक’ कहा जाता है, जिससे यह ज्ञात होता है कि क्रिया किसके द्वारा की गई है। कर्ता कारक की विभक्ति चिन्ह सामान्यतः ‘ने’ होती है, जिसका प्रयोग मुख्य रूप से भूतकाल के वाक्यों में किया जाता है। वर्तमान और भविष्य काल के वाक्यों में प्रायः ‘ने’ का प्रयोग नहीं होता।”
“किसी वाक्य में जो व्यक्ति कार्य करता है, उसे ‘कर्ता’ कहते हैं। अर्थात, कर्ता वह होता है जो किसी क्रिया को करता है।” कर्ता कारक का विभक्ति चिन्न “ने ” होती है |
कर्ता कारक के उदाहरण
अतुल ने कुएं से पानी निकाला। ✅
→ कर्ता: अतुल (क्योंकि उसने पानी निकाला)
राम ने राहुल को पुस्तक दी। ✅
→ कर्ता: राम (पुस्तक देने वाला)
अध्यापक ने परीक्षा ली। ✅
→ कर्ता: अध्यापक (परीक्षा लेने वाला)
बारिश ने फसल ख़राब कर दी। ✅
→ कर्ता: बारिश (क्रिया करने वाली प्राकृतिक शक्ति)
माँ ने बच्चों को लाड़ किया। ✅
→ कर्ता: माँ (लाड़ करने वाली)
गोविंदा ने काम नहीं किया। ✅
→ कर्ता: गोविंदा (काम न करने वाला भी कर्ता होता है)
मधु ने राम को उपहार दिया। ✅
→ कर्ता: मधु (उपहार देने वाली)
अंकिता ने कपड़ों की सिलाई की। ✅
→ कर्ता: अंकिता (सिलाई करने वाली)
मास्टर जी ने बच्चों को पाठ पढ़ाया। ✅
→ कर्ता: मास्टर जी (पढ़ाने वाले)
रविंदर ने अख़बार पढ़ लिया है। ✅
→ कर्ता: रविंदर (अख़बार पढ़ने वाला)
कर्ता कारक का प्रयोग
कर्ता कारक का प्रयोग दो प्रकार से होता है
1. परसर्ग के साथ
2. परसर्ग के बिना
परसर्ग, जिन्हें हिंदी व्याकरण में कारक चिह्न या विभक्ति चिह्न भी कहा जाता है, वे शब्दांश होते हैं जो संज्ञा या सर्वनाम से जुड़कर उसके वाक्य में क्रिया अथवा अन्य पदों के साथ संबंध स्थापित करते हैं। इन्हीं को आप कारक चिह्न कह रहे हैं, जो वाक्य को अर्थवत्ता प्रदान करते हैं
वाक्य में परसर्ग के साथ कर्ता कारक का प्रयोग |
भूतकाल की सकर्मक (transitive) क्रियाओं में कर्ता के साथ ‘ने’ विभक्ति चिह्न लगाया जाता है (सामान्यभूत, पूर्णभूत, आसन्नभूत, संदिग्धभूत काल आदि में)
सीता ने खाना खाया। (खाना = कर्म, भूतकाल, सकर्मक क्रिया)
मैंने उसे सिखाया। (प्रेरणार्थक क्रिया, कर्ता ‘मैं’, विभक्ति ‘ने’)
विजय ने प्रश्न समझाया। (संयुक्त क्रिया में दोनों खण्ड सकर्मक होने पर ‘ने’ का प्रयोग)
वाक्य में परसर्ग के बिना कर्ता कारक का प्रयोग
नियम:
- यदि क्रिया भूतकाल में लेकिन अकर्मक (intransitive) हो, तो ‘ने’ नहीं लगेगा।
- या फिर यदि क्रिया वर्तमान या भविष्यत् काल की हो, तो भी ‘ने’ नहीं लगता।
- साथ ही क्रियाओं जैसे: जाना, लगना, चुकना, सकना आदि में सामान्यतः ‘ने’ प्रयोग नहीं होता
- राम सो गया। (भूतकाल, लेकिन ‘सोना’ अकर्मक → ‘ने’ नहीं)
- बालक खेल रहा है। (वर्तमान काल, सकर्मक हो सकता है पर ‘ने’ नहीं क्योंकि वर्तमान)
- लड़की बाजार जाएगी। (भविष्यत् काल में ‘ने’ नहीं)
- उसे स्कूल जाना है। (‘जाना’ क्रिया के साथ ‘ने’ नहीं लगेगा)
2. कर्म कारक किसे कहते है ?
“जब किसी क्रिया का प्रभाव या फल किसी व्यक्ति या वस्तु पर पड़ता है, तो उसे ‘कर्म कारक’ कहते हैं।”
सरल भाषा में:
जब कोई व्यक्ति कोई काम करता है और उस काम का असर किसी और चीज़ या व्यक्ति पर पड़ता है, तो जिस पर असर पड़ता है, उसे “कर्म कारक” कहते हैं। इसका पता अक्सर वाक्य में ‘को’ शब्द से चलता है, लेकिन हर बार ‘को’ लगाना ज़रूरी नहीं होता।
कुछ क्रियाओं के साथ जब हम किसी संज्ञा (नाम) का प्रयोग करते हैं, तो ‘को’ लगाना ज़रूरी हो जाता है। जैसे : देखना , खोजना , सुलाना, भगाना , चुनना , चूमना, पुकारना आदि |
- राम ने रावण को मारा।
(यहाँ ‘रावण को’ कर्म कारक है क्योंकि मारने की क्रिया का प्रभाव रावण पर पड़ा।) - सीता ने बच्चे को किताब दी।
(‘बच्चे को’ कर्म कारक है क्योंकि देने की क्रिया बच्चे पर हुई।) - माँ ने बच्चे को खाना खिलाया।
(‘बच्चे को’ कर्म कारक है क्योंकि खिलाने की क्रिया बच्चे पर हुई।) - गुरुजी ने छात्र को प्रश्न पूछाया।
(‘छात्र को’ कर्म कारक है क्योंकि प्रश्न पूछाने की क्रिया छात्र पर प्रभाव डालती है।) - राम ने राजा को बुलाया।
(‘राजा को’ कर्म कारक है क्योंकि बुलाने की क्रिया राजा पर हुई।) - वह लड़का कुत्ते को भगाता है।
(‘कुत्ते को’ कर्म कारक है क्योंकि भगाने की क्रिया कुत्ते पर हो रही है।) - मोहन ने फल को छांटा।
(‘फल को’ कर्म कारक है क्योंकि छांटने की क्रिया फल पर हुई।) - हमने मित्र को उपहार दिया।
(‘मित्र को’ कर्म कारक है क्योंकि उपहार देने की क्रिया मित्र पर हो रही है।) - राम ने सर्प को पकड़ा।
(‘सर्प को’ कर्म कारक है क्योंकि पकड़ने की क्रिया सर्प पर हुई।) - मैंने बाज़ार को साफ़ किया।
(‘बाज़ार को’ कर्म कारक है क्योंकि साफ़ करने की क्रिया बाज़ार पर प्रभाव डालती है।)
सारांश: कर्म कारक वह पद होता है जिस पर क्रिया का असर या प्रभाव पड़ता है। Hindi में इसकी पहचान आम तौर पर ‘को’ विभक्ति से होती है, जैसे — “राम ने रावण को मारा।”
यहाँ कर्म कारक के साथ क्रिया का संबंध स्पष्ट होता है जिससे वाक्य का अर्थ सही और पूर्ण बनता है।
यदि कुछ क्रियाओं के साथ सीधे ‘को’ नहीं लगता, तो भी वह कर्म होता है, जैसे “राम ने पानी पिया।” (‘पानी’ कर्म है लेकिन ‘को’ नहीं लगा)।
3. ‘कर्ण कारक किसे कहते है ?
“जब वाक्य में क्रिया किसी साधन या माध्यम के द्वारा की जाती है, तो वह ‘कर्ण कारक’ कहलाता है।” इसका विभक्ति चिह्न ‘से’ और ‘द्वारा’ है।
या
“जब कोई क्रिया किसी साधन या माध्यम से पूर्ण होती है, अर्थात उस साधन की सहायता से क्रिया संपन्न होती है, तो उस साधन को करण कारक कहा जाता है।”
- राम ने कलम से पत्र लिखा।
(यहाँ ‘कलम से’ कर्म का साधन है जिससे पत्र लिखा गया।) - सीता ने तीर से निशाना लगाया।
(‘तीर से’ से निशाने लगाने का साधन स्पष्ट होता है।) - गुरुजी ने स्कूल के कंप्यूटर से पढ़ाया।
(‘स्कूल के कंप्यूटर से’ पढ़ाने का माध्यम बताया गया है।) - माँ ने लकड़ी से आग जलाई।
(‘लकड़ी से’ आग जलाने का कारण या साधन है।) - बालक गेंद से खेल रहा है।
(‘गेंद से’ खेलना करण कारक है क्योंकि गेंद खेल का साधन है।) - लिखित कार्य छात्र ने कंप्यूटर के द्वारा किया।
(‘कंप्यूटर के द्वारा’ कार्य करने का तरीका बताता है।) - शर्मा जी ने चाकू से आम काटा।
(‘चाकू से’ से आम काटने का औजार दर्शाया गया है।) - उन्होंने उन्हें फोन के माध्यम से सूचना दी।
(‘फोन के माध्यम से’ सूचना देने का जरिया है।) - वह संगीत वाद्ययंत्र से संगीत बजाता है।
(‘वाद्ययंत्र से’ संगीत बजाने का साधन है।) - बच्चे ने रंगीन पेन से चित्र बनाया।
(‘रंगीन पेन से’ चित्र बनाने का उपकरण है।)
करण कारक संज्ञा या सर्वनाम के उस रूप को कहते हैं जो किसी क्रिया को करने का साधन या तरीका बताता है। इसके साथ ‘से’, ‘के द्वारा’, ‘के साथ’ जैसे विभक्ति चिह्न लगते हैं।
4. सम्प्रदान कारक किसे कहते है ?
“‘संप्रदान’ का अर्थ होता है – देना या प्राप्त कराना। जब किसी वाक्य में एक व्यक्ति द्वारा किसी दूसरे व्यक्ति के लिए कोई कार्य किया जाए, या क्रिया का फल किसी दूसरे को प्राप्त हो — तो उस प्राप्तकर्ता को व्यक्त करने वाले शब्द को ‘संप्रदान कारक’ कहते हैं।”
सरल शब्दों में: ‘संप्रदान कारक’ वह होता है जिसके लिए कोई कार्य किया जाए, या जिसे कुछ प्राप्त हो।
🔹 संप्रदान कारक का नियम :
संप्रदान कारक = जिसके लिए कुछ कार्य किया जाए / जिसे कुछ प्राप्त हो।
- मैंने राकेश को किताब दी।
- माँ ने बच्चे के लिए दूध बनाया।
- सीता ने राजेश को आम खिला दिया।
- राम ने अपने भाई के लिए फूल खरीदे।
- गुरुजी ने विद्यार्थियों को प्रश्न पूछे।
- तुमने मेरी मदद के लिए बहुत धन्यवाद किया।
- अंजली ने मीना को नया उपहार दिया।
- भारती ने अपने पिता के लिए चाय बनाई।
- विकास ने गरीबों को खाना खिलाया।
- मैं तुम्हारे लिए यह ख़त लिख रहा हूँ।
इन वाक्यों में “को” और “के लिए” से यह स्पष्ट होता है कि कार्य किसके लिए या किसको किया गया है, इसलिए ये सभी सम्प्रदान कारक के उदाहरण हैं।
5. अपादान कारक किसे कहते है ?
“जब किसी वाक्य में किसी वस्तु का किसी अन्य वस्तु से अलग होने, दूर होने, या हटने का बोध हो — तो उस बोध को प्रकट करने वाले पद को ‘अपादान कारक’ कहते हैं।”
अपादान कारक के 10 उदाहरण:
- राम पेड़ से गिर गया।
— यहाँ ‘पेड़ से’ स्थान से अलग होने का भाव दर्शाता है। - पक्षी घोंसले से बाहर उड़ गया।
- वह गुरुजी से बहुत दूर रहता है।
- तुम पुस्तक से कागज निकालो।
- सांप बिल से निकल गया।
- पानी थाली से गिरी।
- हम बाजार से लौट आए।
- राजू नदी से तैर कर आया।
- बच्चा अपनी माँ से डरता है।
- बिल्ली कुर्सी से नीचे कूद गई।
इन वाक्यों में “से” का प्रयोग किसी वस्तु, स्थान या व्यक्ति से अलग होने, निकलने या दूरी दर्शाने के लिए हुआ है। इसलिए ये सभी अपादान कारक के उदाहरण हैं।
6.अधिकरण कारक किसे कहते है ?
“जब किसी वाक्य में यह पता चले कि क्रिया कहाँ पर हुई है, अर्थात जिस स्थान, समय या स्थिति पर कोई क्रिया घटित होती है — उसे प्रकट करने वाले शब्द को ‘अधिकरण कारक’ कहते हैं।”
जिस शब्द से क्रिया के होने का स्थान, समय या आधार ज्ञात होता है, वह अधिकरण कारक कहलाता है। इसके विभक्ति चिन्ह आमतौर पर “में” और “पर” होते हैं।
उदाहरण:
- बच्चा कमरे में खेल रहा है।
- किताब टेबल पर रखी है।
- पानी में मछली तैरती है।
- वह शाम चार बजे पर आएगा।
- छात्र पुस्तकालय में पढ़ाई कर रहे हैं।
- फूल बगीचे में खिले हैं।
- पंछी छत पर बैठा है।
- वे त्योहार में खुश होते हैं।
- सामान अलमारी में रखा है।
- बारिश में भी उसने दौड़ लगाई।
व्याख्या: प्रत्येक वाक्य में “में” या “पर” क्रिया के आधार, स्थान या समय को दर्शाता है।
7. संबंध कारक किसे कहते है ?
“जब किसी वाक्य में दो संज्ञाओं या संज्ञा और सर्वनाम के बीच संबंध प्रकट हो, तो उस संबंध को प्रकट करने वाले शब्द रूप को ‘संबंध कारक’ कहते हैं।”
जिस शब्द से किसी वस्तु, व्यक्ति या स्थान का दूसरे से संबंध प्रकट होता है, वह संबंध कारक कहलाता है। इसके विभक्ति चिन्ह होते हैं जैसे “का”, “की”, “के”।
उदाहरण:
- यह संजय का बैग है।
- कविता की किताब खो गई।
- यह गाँव मेरे के पास है।
- रीता और सुरेश के घर में पार्टी है।
- मेरा दोस्त अमित का भाई है।
- वह क्रिकेटर टीम का सदस्य है।
- सोनू ने राम की मदद की।
- यहाँ बच्चों के खेलने की जगह है।
- माँ की ममता सबसे अनमोल है।
- देव की गाड़ी तेजी से चल रही है।
व्याख्या: ये वाक्य यह दिखाते हैं कि कोई वस्तु या व्यक्ति किससे संबंधित या किसकी है।
8. संबोधन कारक किसे कहते है ?
“जब किसी शब्द का प्रयोग किसी व्यक्ति को बुलाने, पुकारने या सचेत करने के लिए किया जाए, तो उसे ‘संबोधन कारक’ कहते हैं।”
जब किसी व्यक्ति या वस्तु को मुखर होकर पुकारा जाता है, उस शब्द को संबोधन कारक कहते हैं। इसमें कोई विभक्ति चिन्ह नहीं होता, यह विशेष रूप से सम्बोधन के लिए होता है।
उदाहरण:
- हे राम! तुम कहाँ जा रहे हो?
- अरे सीता, यहाँ आओ।
- वाह भूखे, खाना खा लो।
- ओ ज़हीर, ध्यान दो।
- हे प्रिया! यह तुम्हारे लिए है।
- सुनो राजेश, मुझे मदद चाहिए।
- अरे वाह! क्या सुंदर नज़ारा है।
- अजमेर, जल्दी आओ।
- हे अध्यापक जी, कृपया सुनिए।
- ओ चमकदार चाँद, आज बहुत सुंदर लग रहा है।
व्याख्या: ये वाक्य सीधे किसी को सम्बोधित करने के लिए बने हैं, जैसे पुकारना या आह्वान करना।
कर्म कारक और सम्प्रदान कारक में अंतर
| विशेषता | कर्म कारक | सम्प्रदान कारक |
| परिभाषा | वह कारक जिसमें क्रिया का सीधा असर किसी वस्तु या व्यक्ति पर पड़ता है। | वह कारक जिसमें क्रिया का फल किसी दूसरे व्यक्ति को दिया जाता है। |
| विभक्ति प्रयोग | सामान्यतः द्वितीया विभक्ति (को, को) का प्रयोग होता है। | सामान्यतः चतुर्थी विभक्ति (को) का प्रयोग होता है। |
| क्रिया से सम्बन्ध | क्रिया का कार्य वस्तु पर सीधा होता है। | क्रिया का फल किसी प्राप्तकर्ता को दिया जाता है। |
| उदाहरण | राम ने फल खाया। (यहाँ “फल” कर्म कारक है) | राम ने सीता को फूल दिया। (यहाँ “सीता” सम्प्रदान कारक है) |
| क्रिया का असर | क्रिया का असर कर्म पर होता है। | क्रिया का परिणाम किसी और को प्राप्त होता है। |
करण कारक और अपादान कारक में अंतर
| विशेषता | करण कारक | अपादान कारक |
| परिभाषा | वह कारक जिससे कार्य किया जाता है। | वह कारक जिससे कोई वस्तु अलग होती है या दूरी बनाई जाती है। |
| विभक्ति प्रयोग | सामान्यतः तृतीया विभक्ति (से) का प्रयोग होता है। | सामान्यतः पंचमी विभक्ति (से) का प्रयोग होता है। |
| क्रिया से सम्बन्ध | क्रिया का साधन या माध्यम होता है। | क्रिया से वियोग, दूरी या हटाव प्रकट होता है। |
| उदाहरण | राम ने काटे से लकड़ी काटी। (यहाँ “काटे” करण कारक है) | पक्षी पिंजरे से उड़ गया। (यहाँ “पिंजरे” अपादान कारक है) |
| क्रिया का असर | क्रिया को करने के साधन को दर्शाता है। | किसी चीज़ के हटने, अलग होने या छूटने को दर्शाता है। |
कारक से सम्बंधित प्रश्र ?
1. कारक किसे कहते हैं?
उत्तर:
कारक वह संबंध है जो संज्ञा या सर्वनाम और क्रिया के बीच होता है।
सरल शब्दों में, वह पद जिससे क्रिया का संबंध जुड़ता है, उसे कारक कहते हैं।
यह यह बताता है कि क्रिया कौन कर रहा है, किसके लिए हो रही है, किससे हो रही है आदि।
2. कारक के कितने भेद होते हैं?
उत्तर:
कारक के सात (7) भेद होते हैं।
3. कारक के सभी भेदों के नाम लिखिए:
उत्तर:
- कर्त्ता कारक
- कर्म कारक
- करण कारक
- सम्प्रदान कारक
- अपादान कारक
- अधिकारण कारक
- सम्बन्ध कारक (कुछ व्याकरणों में इसे अलग से नहीं गिना जाता)
अधिकतर व्याकरण में पहले 6 को ही मुख्य कारक माना जाता है।
4. विभक्ति चिन्ह क्या होते हैं?
उत्तर:
विभक्ति चिन्ह वे शब्द या चिह्न होते हैं जो संज्ञा या सर्वनाम के साथ जुड़कर उसके कारक को दर्शाते हैं।
जैसे – ने, को, से, का, की, के, में, पर आदि।
उदाहरण:
- राम ने आम खाया। → “ने” कर्ता कारक का विभक्ति चिन्ह है।
- उसने मुझे किताब दी। → “को / मुझे” सम्प्रदान कारक का विभक्ति चिह्न है।
5. कारक के 10 उदाहरण दीजिए:
| वाक्य | कारक का नाम | चिह्न |
| राम ने खाना खाया। | कर्ता कारक | ने |
| सीता को फूल दिया। | सम्प्रदान कारक | को |
| मैंने कैंची से कपड़ा काटा। | करण कारक | से |
| पक्षी पिंजरे से उड़ गया। | अपादान कारक | से |
| वह पुस्तक पढ़ रही है। | कर्म कारक | — (सीधा कर्म) |
| बच्चा बिस्तर पर सो गया। | अधिकारण कारक | पर |
| वह मुझसे नाराज़ है। | अपादान कारक | से |
| उन्होंने हाथों से ताली बजाई। | करण कारक | से |
| गीता के भाई का नाम अमित है। | सम्बन्ध कारक | के |
| बच्चे में साहस है। | अधिकारण कारक | में |
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